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हाशिये के इधर उधर

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Comment by amita tiwari on July 13, 2016 at 10:48pm

तहे दिल से शुक्रिया

Comment by Ashok Kumar Raktale on July 13, 2016 at 10:45pm

वाह ! बहुत सुंदर भावपूर्ण रचना हुई है आदरणीया अमिता तिवारी जी. सादर.

Comment by Dr. Vijai Shanker on July 12, 2016 at 9:18pm
आदरणीय सुश्री अमिता तिवारी जी , सच तो यही है कि आँखें वही ढूंढती हैं जो अच्छा लगे , कान वही सुनना चाहते हैं जो अच्छा लगे , अच्छी प्रस्तुति है , पर कहीं बहुत अच्छी बात तो यह कह दी आपने ,
" जैसे किसी बड़े कद को
मिल् जाती हैं बेलफजी उपमाएं
वो उपमाएं जो उघाड़ कर रख दे
समाज की सभ्यता के पैबंद ,"
बहुत बहुत बधाई , संभवतः इस प्रथम प्रस्तुति पर , सादर।
Comment by amita tiwari on July 12, 2016 at 9:00pm

"आपको  पसंद आई .........तहे दिल से शुक्रिया

Comment by Samar kabeer on July 11, 2016 at 10:05pm
मोहतरमा तिवारी जी आदाब,क्या कहने इस कविता मन को भा गई,खूबसूरत अहसासात से सजी इस प्रस्तुति के लिये दिल से ढेरों बधाइयाँ स्वीकार करें ।

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