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गज़ल-दिल तेरे बिन कहीं अब बहलता नही।

वह्र-212 212 212 212

दिल तेरे बिन कहीं अब बहलता नही।
दर्द सीने में है दम निकलता नही।।

दर्द दिल का बढ़ा जा रहा है बहुत।
दर्दे दिल पे कोई जोर चलता नही।।

सिसकियों से मेरी दिल पिघलते गए।
दिल तेरा ये भला क्यूँ पिघलता नही।।

टालता हूँ बहुत ख़्वाब तेरे सनम।
टालने से मगर अब ये टलता नही।।

काश! मिल जाए तेरा सहारा मुझे।
बिन सहारे ये दिल अब सँभलता नही।।

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by रामबली गुप्ता on July 15, 2016 at 6:21pm
आद0 अशोक कुमार भाई जी गज़ल पर प्रतिक्रिया और हौसला आफजाई के लिए तहेदिल से शुक्रिया।
Comment by रामबली गुप्ता on July 15, 2016 at 6:19pm
आद0 गिरिराज भाई जी रचना आपको अच्छी लगी इसके लिए हृदयतल से आभार।
Comment by रामबली गुप्ता on July 15, 2016 at 6:17pm
आद0 राजेश कुमारी जी रचना पर हौसला अफजाई के लिए आपका बहुत बहुत आभार
Comment by रामबली गुप्ता on July 15, 2016 at 6:16pm
आद0 जयनित भाई जी रचना पर आपकी प्रतिक्रिया के लिए हृदय से आभार
Comment by रामबली गुप्ता on July 15, 2016 at 6:14pm
आद0 समर कबीर जी गज़ल आपको पसन्द आई इसके लिए तहेदिल से शुक्रिया। चौथे शेर के संबंध में आपके सुझावानुरूप संशोधन कर चुका हूँ।सादर
Comment by Ashok Kumar Raktale on July 13, 2016 at 11:48pm

आदरणीय रामबली गुप्ता जी सादर, बहुत अच्छी गजल कही है.बहुत-बहुत बधाई. चौथे शेर पर पहले भी आदरणीय समर साहब द्वारा और आदरणीया राजेश कुमारी जी द्वारा कुछ कहा गया है. किन्तु मुझे तो यही समझ नहीं आया ख्वाब किस तरह टाले जाते हैं. सादर.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 13, 2016 at 11:04am

आदरणीय राम बली भाई , अच्छी गज़ल हुई है , हार्दिक बधाइयाँ स्वीकार करें ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 12, 2016 at 9:30pm

आद०  रामबली गुप्ता जी ,अच्छी ग़ज़ल हुई है 

टालता ख़्वाब तेरा रहा मैं सनम ----ऐसा कर सकते हैं 

बहुत बहुत बधाई आपको 

Comment by जयनित कुमार मेहता on July 12, 2016 at 6:09pm
आदरणीय रामबली जी,
ग़ज़ल अच्छी बन पड़ी है। चौथे शेर के सम्बन्ध में आदरणीय समर कबीर जी की बात पर ध्यान दीजियेगा। सादर।।
Comment by Samar kabeer on July 12, 2016 at 4:02pm
जनाब रामबली गुप्ता जी आदाब,बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है, दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं ।
चौथे शैर का ऊला मिसरा बहु वचन में है और सानी में एक वचन है, देखिएगा ।

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