For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

धर्म-प्रदूषण (लघुकथा)

उस विशेष विद्यालय के आखिरी घंटे में शिक्षक ने अपनी सफेद दाढ़ी पर हाथ फेरते हुए, गिने-चुने विद्यार्थियों से कहा, "काफिरों को खत्म करना ही हमारा मक़सद है, इसके लिये अपनी ज़िन्दगी तक कुर्बान कर देनी पड़े तो पड़े, और कोई भी आदमी या औरत, चाहे वह हमारी ही कौम के ही क्यों न हों, अगर काफिरों का साथ दे रहे हैं तो उन्हें भी खत्म कर देना| ज़्यादा सोचना मत, वरना जन्नत के दरवाज़े तुम्हारे लिये बंद हो सकते हैं, यही हमारे मज़हब की किताबों में लिखा है|"

 

"लेकिन हमारी किताबों में तो क़ुरबानी पर ज़ोर दिया है, दूसरों का खून बहाने के लिये कहाँ लिखा है?" एक विद्यार्थी ने उत्सुक होकर पूछा|

 

"लिखा है... बहुत जगहों पर, सात सौ से ज़्यादा बार हर किताब पढ़ चुका हूँ, हर एक हर्फ़ को देख पाता हूँ|"

 

"लेकिन यह सब तो काफिरों की किताबों में भी है, खून बहाने का काम वक्त आने पर अपने खानदान और कौम की सलामती के लिए करना चाहिए| चाहे हमारी हो या उनकी, सब किताबें एक ही बात तो कहती हैं..."

 

"यह सब तूने कहाँ पढ़ लिया?"

 

वह विद्यार्थी सिर झुकाये चुपचाप खड़ा रहा, उसके चेहरे पर असंतुष्टि के भाव स्पष्ट थे|

 

"चल छोड़ सब बातें..." अब उस शिक्षक की आवाज़ में नरमी आ गयी, "तू एक काम कर, अपनी कौम को आगे बढ़ा, घर बसा और सुन, शादीयां काफिरों की बेटियों से ही करना..."

 

"लेकिन वो तो काफिर हैं, उनकी बेटियों से हम पाक लोग शादी कैसे कर सकते हैं?"

 

शिक्षक उसके इस सवाल पर चुप रहा, उसके दिमाग़ में यह विचार आ रहा था कि “है तो नहीं लेकिन फिर भी कल मज़हबी किताबों में यह लिखा हुआ बताना है कि, ‘उनके लिखे पर सवाल उठाने वाला नामर्द करार दे दिया जायेगा’|”

(मौलिक और अप्रकाशित)

Views: 682

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on September 24, 2016 at 9:57pm

यह तो आत्ममंथन से ही दूर हो पायेगी | बहुत ही गंभीर बात कही है अपने आदरणीय चंद्रेश भैया | बहुत बहुत बधाई |

Comment by Dr. Chandresh Kumar Chhatlani on July 20, 2016 at 9:21pm

लघुकथा के इस प्रयास पर आपकी उत्साह बढाती अमूल्य टिप्पणी हेतु सादर आभार आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी सर|


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 19, 2016 at 2:00pm

एक तार्किक प्रस्तुति केलिए हार्दिक धनय्वाद और शुभकामनाएँ आदरणीय चन्द्रेश जी. 

Comment by Dr. Chandresh Kumar Chhatlani on July 19, 2016 at 12:50pm

आदरणीय  शेख शहज़ाद उस्मानी  जी  साहब, आदरणीया  राहिला  जी, आदरणीय  राजेंद्र  गौड़ भाई जी, आदरणीय अशोक कुमार जी, आदरणीया राजेश कुमार जी, आप सभी का तहे दिल से सादर धन्यवाद्, आपको लघुकथा का प्रयास ठीक लगा, और अपनी टिप्पणी द्वारा आप सभी ने मेरा उत्साह वर्धन किया| 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 18, 2016 at 9:34pm

बहुत अच्छी सीख ,प्रेरणा देती हुई लघु कथा कहते हैं न जहर को जहर मारता है आज के समझदार युवा ही अपने धर्म ग्रंथों के बारे में गलत बात का प्रचार करने वालों की आँखों में आँखें डाल कर बात करेंगे आज इसकी जरूरत भी है | हार्दिक बधाई आपको चन्द्रेश कुमार जी  

Comment by Ashok Kumar Raktale on July 18, 2016 at 6:48pm

वाह ! सुंदर लघुकथा. सही को सही और गलत को गलत कहने वालों को आगे आने की जरूरत है. सादर.

Comment by RAJENDER KUMAR GAUR on July 18, 2016 at 5:41pm
केवल और केवल अंतर विरोध ही सुधार करे किसी भी समाज का
बहुत सार्थक कथा बधाई भाई जी
Comment by Rahila on July 17, 2016 at 11:54am
“है तो नहीं लेकिन फिर भी कल मज़हबी किताबों में यह लिखा हुआ बताना है कि, ‘उनके लिखे पर सवाल उठाने वाला नामर्द करार दे दिया जायेगा’|”
काश इस बात की गहराई हर इंसान समझ सके कि कोई मज़हब ग़लत संदेश नही देता ।बस चन्द दूषित मानसिकता वाले अपने स्वार्थ के लिए माहौल ख़राब करने से बाज़ नही आते।
बहुत बधाई आपको इस उत्कृष्ट रचना के लिए ।सादर
Comment by Sheikh Shahzad Usmani on July 17, 2016 at 8:15am
संस्कृति और राजनीति में व्याप्त प्रदूषण की तरह वास्तविक धर्म को प्रदूषित कर रही ताक़तों से संबंधित कुछ अहम मुद्दे उठाती बढ़िया प्रस्तुति के लिए हृदयतल से बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीय चन्द्रेश कुमार छतलानी जी। शब्द 'काफ़िर' का वास्तविक व्यापक अर्थ हम सभी को समझ लेना चाहिए, उसके संकीर्ण भाव वाले अर्थ की बजाय। अक्सर लोग इस शब्द को लेकर भ्रमित रहते हैं। ऐसे प्रदूषण फैलाने वाले चंद लोगों के कारण किसी विशेष धर्म या संप्रदाय के प्रति कोई ग़लतफहमी पालने से पहले संबंधित धर्म ग्रंथों का व उनके 'असली/वास्तविक' अनुवादित संस्करणों का अध्ययन हमें कर लेना चाहिए। आशय यह है भ्रामक जानकारी फैलाने वालों से हमें सदैव सावधान रहना चाहिए।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"जी बहुत शुक्रिया आदरणीय चेतन प्रकाश जी "
yesterday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आदरणीय मिथलेश वामनकर जी, प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।"
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आ.लक्ष्मण सिंह मुसाफिर साहब,  अच्छी ग़ज़ल हुई, और बेहतर निखार सकते आप । लेकिन  आ.श्री…"
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आ.मिथिलेश वामनकर साहब,  अतिशय आभार आपका, प्रोत्साहन हेतु !"
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"देर आयद दुरुस्त आयद,  आ.नीलेश नूर साहब,  मुशायर की रौनक  लौट आयी। बहुत अच्छी ग़ज़ल…"
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
" ,आ, नीलेशजी कुल मिलाकर बहुत बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई,  जनाब!"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आ. भाई मिथिलेश जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और स्नेह के लिए आभार।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आ. भाई नीलेश जी, सादर अभिवादन।  गजल पर उपस्थिति और स्नेह के लिए आभार। भाई तिलकराज जी द्वार…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आ. भाई तिलकराज जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और विस्तृत टिप्पणी से मार्गदर्शन के लिए आभार।…"
yesterday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"तितलियों पर अपने खूब पकड़ा है। इस पर मेरा ध्यान नहीं गया। "
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी नमस्कार बहुत- बहुत शुक्रिया आपका आपने वक़्त निकाला विशेष बधाई के लिए भी…"
yesterday

© 2025   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service