For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मूल में क्या नशा बो रहा (महालक्ष्मी छंद )

महालक्ष्मी छंद

 

घूस से जो खड़ा हो गया

क्या सभी से बड़ा हो गया?

आग में जो तपा झूठ की

एक थोथा घड़ा हो गया

 

ज्ञान वाला यहाँ हारता

मूर्ख बाजी यहाँ मारता

मार देता वही साँच को    

झूठ का वेष जो धारता   

 

आज का  हाल क्या हो रहा

क्यूँ युवा देश का खो रहा

सूखती पौध आशा भरी

मूल में क्या नशा बो रहा

 

सोचता है युवा क्यूँ पढूँ

है कहाँ राह आगे बढूँ

हो न पूरे यहाँ जो कभी

ख़्वाब मैं वो यहाँ क्यूँ गढ़ूँ

 

सो रहे वो जगाना तुझे

मार्ग सीधा दिखाना तुझे

थाम तू लेखनी को अभी

पीढ़ियों को सिखाना तुझे

मौलिक एवं अप्रकाशित 

 

Views: 1010

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 27, 2016 at 11:00am

आद० रामबली  जी ,आपको छंद पसंद आया  आपका दिल से प्रभूत  आभार |

Comment by रामबली गुप्ता on July 20, 2016 at 11:09pm
वाह आदरेया बहुत ही सुंदर छंद रचना हुई है। हृदय से बधाई स्वीकार करें।सादर

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 20, 2016 at 9:00pm

आद० समर भाई जी ,आपको छंद अच्छा लगा इस होंसलाफ्जाई के लिए दिल से आभार |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 20, 2016 at 8:59pm

आद०  सुशील सरना जी,आपको ये छंद पसंद आया आपको दिल से बहुत- बहुत आभार|  

Comment by Samar kabeer on July 20, 2016 at 6:44pm
बहना राजेश कुमारी जी आदाब,ये छन्द पहली बार पढ़ रहा हूँ,बहुत अच्छा लगा बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Ashok Kumar Raktale on July 20, 2016 at 1:28pm

आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, तुकांतता पर आपके द्वारा, सदैव लाभकारी, अच्छी जानकारी दी गई है.सादर आभार.

Comment by Sushil Sarna on July 19, 2016 at 7:19pm

सो रहे वो जगाना तुझे
मार्ग सीधा दिखाना तुझे
थाम तू लेखनी को अभी
पीढ़ियों को सिखाना तुझे

शानदार के अतिरिक्त कुछ और नहीं बनता आदरणीया राजेश कुमारी जी ... इस मनमोहक प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 19, 2016 at 1:08pm

तुकान्तता को लेकर कृपया कोई भ्रम न बने. 

कई छन्द जो समान आवृति में दो भागों में विभक्त होते हैं, उनमें दो तरह से तुकान्तता के निर्वाह का चलन है. एक, पदान्त की तुकान्तता और दूसरे, चरणान्त की तुकान्तता. जैसे कि उल्लाला छन्द में कई छन्दकार चरणान्त की तुकान्तता का निर्वहन करते हैं, तो कई विद्वान पदान्त की तुकान्तता का निर्वहन करते है. 

सादर


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 19, 2016 at 11:38am

आद० अशोक रक्ताले जी ,छंद पर आपकी बधाई का हार्दिक स्वागत |आपने सही कहा चरण  तुकांत होना चाहिए 

मैंने छंद चरण मुक्तक लिखे हैं दूसरी बात चरण अलग अलग लिखे हैं यदि आपकी तरह लिखूँ तो 

घूस से जो खड़ा हो गया, क्या सभी से बड़ा हो गया?

यदि द्वीपदी लिखती  तो इसी तरह लिखती ..सादर ,

आपकी  तुकांतता एक दम सही है 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 19, 2016 at 11:26am

प्रस्तुति पर  आपकी उपस्थिति और सराहना दोनों के लिए  हार्दिक रूप से आभारी हूँ  आद० सौरभ पाण्डेय जी |

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। गिरह सहित सुंदर गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
4 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"2122, 1212, 112**बिसलरी पा  नदी को भूल गयाहर अधर तिस्नगी को भूल गया।१।*पथ की हर रौशनी को भूल…"
4 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"सादर अभिवादन।"
4 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"क्या गिला वो किसी को भूल गय इश्क़ में जो ख़ुदी को भूल गया अम्न का ख़्वाब देखा रात को इक और फिर रात…"
8 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"सादर अभिवादन "
8 hours ago
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"स्वागतम"
9 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। चौपाइयों पर उपस्थिति, स्नेह और मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। आपकी…"
Monday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"प्रस्तुति का सहज संशोधित स्वरूप।  हार्दिक बधाई"
Sunday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, प्रदत्त चित्र को आपने पूरे मनोयोग से परखा है तथा अंतर्निहित भावों को…"
Sunday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी, आपने प्रस्तुति के माध्यम से प्रदत्त चित्र को पूरी तरह से शाब्दिक किया है…"
Sunday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी, आपकी प्रस्तुति का हार्दिक धन्यवाद  परन्तु, रचना सोलह मात्राओं खे चरण…"
Sunday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण भाईजी, चौपाई छंद में आपने प्रदत्त चित्र को उपयुक्त शब्द दिये हैं. सुगढ़ रचना के…"
Sunday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service