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ग़ज़ल - उस मंज़र को खूनी मंज़र लिक्खा है ( गिरिराज भंडारी ) ज़मीन , मोहतरम जनाब समर कबीर साहिब ।

आदरणीय समर कबीर साहब की ज़मीन पर एक ग़ज़ल
22   22   22   22   22   2

उस मंज़र को खूनी मंज़र लिक्खा है

***********************************

जिसने तुझको यार सिकंदर लिक्खा है

तय है उसने ख़ुद को कमतर लिक्खा है

 

समाचार में वो सुन कर आया होगा

एक दिये को जिसने दिनकर लिक्खा है

 

वो दर्पण जो शक़्ल छिपाना सीख गये

सोच समझ कर उनको पत्थर लिक्खा है

 

भाव मरे थे , जिस्म नहीं, तो भी मैने

उस मंज़र को खूनी मंज़र लिक्खा है

 

हाँ गलती उसने भी की होगी लेकिन

इंच इंच को तुमने गज भर लिक्खा है

 

क्षत विक्षत देखें हैं मैनें हृदय कई 

तब शब्दों को मैंने ख़ंज़र लिक्खा है

 

ख़ुद को जर्जर लिखने से बचकर उसने 

गढ्ढे को भी एक समन्दर लिक्खा है

 

पर्दे पीछे हाथ मिलाया है जिसने

जब लिख्खा है, थोड़ा बचकर लिक्खा है
***********************************

मौलिक एवँ अप्रकाशित  ( संशोधित )

 

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 26, 2016 at 5:24pm

आदरणीय श्याम नाराइन भाई , उत्साह वर्धन के लिये आपका हार्दिक आभार ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 26, 2016 at 5:24pm

आदरनीय महेन्द्र भाई , सराहना के लिये आपका हार्दिक आभार ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 26, 2016 at 5:23pm

आदरणीय श्री सुनील भाई , सराहना और उत्साह वर्धन के लिये आपका हृदय से आभार ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 26, 2016 at 5:23pm

आदरनीय सुशील भाई , हौसला अफज़ाई का तहे दिल से शुक्रिया आपका ।

Comment by Shyam Narain Verma on July 26, 2016 at 12:24pm
वाह वाह, बहुत बढ़िया ग़ज़ल हुई है, दाद हाज़िर है। सादर
Comment by Mahendra Kumar on July 26, 2016 at 6:43am
हाँ गलती उसने भी की होगी लेकिन
इंच इंच को तुमने गज भर लिक्खा है ...वाह! इस उम्दा ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें आदरणीय गिरिराज सर, सादर!
Comment by shree suneel on July 26, 2016 at 3:02am
आदरणीय गिरिराज सर जी, उम्दा ग़ज़ल.. उम्दा अशआर. . पेश किये हैं. बहुत ख़ूब! दिल से बधाई आपको. सादर.
Comment by Sushil Sarna on July 25, 2016 at 6:59pm

क्षत विक्षत देखें हैं मैनें हृदय कई
तब शब्दों को मैंने ख़ंज़र लिक्खा है

निःशब्द हूँ आदरणीय गिरिराज जी भाई साहिब आपके इस ग़ज़ल में भावों के ऐसा मनभावन मंज़र देखकर। हार्दिक हार्दिक बधाई सर जी।

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