For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

वह प्रीत की फसल उगाती है/ कविता

मेरा निश्छल मन
किसी से बैर
या शत्रुता नहीं
पालता है।

वह पालता है
प्रीत की सघनता को
वो बहता रहता है
भाव की अविचलता में
उसे फुरसत नहीं
प्रेम में बहते रहने से
उसकी दृष्टि हटती नहीं
अपने प्रियतम से।

हृदय की गहन तलहटी में
उनकी गुंजों में डूबी हुई
भोर की दूर्बा-सी
ओस को आँखों में सजाये
गुँथा करती है
प्रतिदिन जयमाल
मन के फूलों से।

कोकिल-सी कूक लिये
अंधकार को बेधा करती है

तरंगित मन के ज्वारों को
फुरसत नहीं मिलती
देखने की
दुनिया के जुआघर
और जुआरियों को।

चौपड़ों की चालों से इतर
वह मन मग्न
रात में भी भोर-सी
अंगराई लेती रहती है
वह जीवन की तान में
अपने मन की गान में
मग्न हो,खुद को बोती रहती है
सिर्फ प्रीत की फसल उगाती है
वह प्रीत की फसल उगाती है।

मौलिक और अप्रकाशित

Views: 936

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Ram Ashery on September 16, 2016 at 3:56pm

कांता मैडम जी अपने अपने मन की व्यथा को बड़े ही मार्मिक ढंग से व्यक्त किया है आपको बहुत बहुत बधाई स्वीकार हो 

Comment by kanta roy on September 4, 2016 at 2:24pm
आपका रचना पर उपस्थिती रचनाकर्म को सफल बना जाता है। आभार आपका हृदय से।
Comment by kanta roy on September 4, 2016 at 2:23pm
रचना के भाव पर आश्वस्ति जताने के लिये आभारी हूूँ आपका आदरणीय ब्रजेश जी।
Comment by kanta roy on September 4, 2016 at 2:21pm
रचना पसंदगी व प्रोत्साहन के लिये हृदय से आभार आपका आदरणीय अशोक जी।
Comment by pratibha pande on August 7, 2016 at 1:00pm

तरंगित मन के ज्वारों को
फुरसत नहीं मिलती
देखने की
दुनिया के जुआघर
और जुआरियों को..  .गहन भावों को  सुन्दर शब्द मिले हैं आपकी इस रचना में ,  हार्दिक बधाई प्रेषित है इस रचना पर आदरणीया कांता जी 

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on August 6, 2016 at 9:50pm

सुन्दरतम भाव वाह....हार्दिक बधाई 

Comment by Ashok Kumar Raktale on August 6, 2016 at 10:56am

वह पालता है
प्रीत की सघनता को
वो बहता रहता है
भाव की अविचलता में
उसे फुरसत नहीं
प्रेम में बहते रहने से
उसकी दृष्टि हटती नहीं
अपने प्रियतम से।..............वाह ! मन के सुन्दरतम भावों को प्रदर्शित करती सुन्दर रचना. बहुत-बहुत बधाई आदरणीया कान्ता रॉय जी. सादर.

Comment by Sushil Sarna on August 4, 2016 at 1:41pm

आदरणीया कान्ता रॉय जी मेरे कहे को मान देने का हार्दिक आभार। 

Comment by kanta roy on August 4, 2016 at 11:53am
आभार आपका आदरणीय सतविन्द्र जी,रचना को मान देने के लिये।
Comment by kanta roy on August 4, 2016 at 11:50am
हृदय से आभार आपका आदरणीय सुशील जी रचनापर आकर मेरा मनोबल बढ़ाने के लिये। आपके द्वारा सुझाया हुआ मार्गदर्शन सही हुआ है। वाकई मैने यह गलती की है। सुधार का प्रयास करती हूूँ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

amita tiwari posted a blog post

गर्भनाल कब कट पाती है किसी की

कहीं भी कोई भी माँ अमर तो नहीं होती एक दिन जाना होता ही है सब की माताओ को फिर भी जानते बूझते भी…See More
8 hours ago
vijay nikore commented on Sushil Sarna's blog post दोहा दशम. . . . . उम्र
"भाई सुशील जी, सारे दोहे जीवन के यथार्थ में डूबे हुए हैं.. हार्दिक बधाई।"
13 hours ago
vijay nikore posted a blog post

प्यार का पतझड़

एक दूसरे में आश्रय खोजतेभावनात्मक अवरोधों के दबाव मेंकभी ऐसा भी तो होता है ...समय समय से रूठ जाता…See More
20 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"प्रारम्भ (दोहे) अंत भला तो सब भला, कहते  सब ये बात। क्या आवश्यक है नहीं, इक अच्छी…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"आदरणीय  जयहिंद रायपुरी जी अच्छा हायकू लिखा है आपने. किन्तु हायकू छोटी रचना है तो एक से अधिक…"
Sunday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"हाइकु प्रारंभ है तो अंत भी हुआ होगा मध्य में क्या था मौलिक एवं अप्रकाशित "
Saturday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"स्वागतम"
Friday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
Apr 8
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद ' जी सादर अभिवादन प्रथम तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ देरी से आने की…"
Apr 7
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा दशम. . . . . उम्र

दोहा दशम् . . . . उम्रठहरी- ठहरी उम्र अब, करती एक सवाल ।कहाँ गई जब जिंदगी, रहती थी खुशहाल ।।यादों…See More
Apr 6
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार। बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। /ये मेरा…"
Apr 3
आशीष यादव added a discussion to the group धार्मिक साहित्य
Thumbnail

चल मन अब गोकुल के धाम

चल मन अब गोकुल के धाम अद्भुत मनहर बाल रूप में मिल जाएंगे श्याम कि चल मन अब……………………….कटि करधनी शीश…See More
Apr 3

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service