For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

बराबरी का पैमाना /लघुकथा

"स्त्री स्वातंत्र्य दरअसल पितृसत्ता के विरूद्ध संघर्ष और विरोध है। भावनात्मक ,सामाजिक ,शारीरिक और आर्थिक स्तरों पर पितृसत्ता की जकड़न,उनके पाखंडों का उद्घाटन ही हमारा लक्ष्य है" कहते-कहते वह उत्तेजित हो उठी। सहसा उसे भान हुआ, वो अपने ऑफिस केन्टीन में नहीं, रेस्तरां में है।विलास को उसकी ये बातें अच्छी लगती थी लेकिन आजू-बाजू देख वह संकोच से भर उठी। इस विषय पर वह स्वयं को क्यूँ रोक नहीं पाती है?
तभी बेयरा ऑर्डर लेने आ गया।
"तुम बीयर या जिन तो ले सकती हो, मेरा साथ देने के लिये "
" नहीं!"
" क्यों नहीं, लेडिज ड्रिंक है यह दोनों। आजकल तो औरतें खुलकर शराब पीती है। "

" ड्रिंक में भी स्त्री-पुरूष का भेद होता है? "
" हाँ, यह दोनों पेय सॉफ्ट होते है, तुम्हें पीकर देखना चाहिये।"
"नहीं, मै शराब नहीं पीती! नो थैंक्स!"
"कैसी वूमन लिबरेशन वाली हो तुम? "
" लिबरेशन का मतलब शराब पीना हरगिज नहीं है। फिर यह अपनी -अपनी मर्जी की बात होती है।"
"जब पुरुष से समानता का अधिकार की बात करती हो तो सब कुछ पुरुष की तरह ही स्वीकार करो, संकोच नहीं करना चाहिए। "
" गलत काम में संकोच होना ही चाहिये जनाब! क्या स्त्री स्वातंत्र्य चरित्र-हीनता का परिचायक होगा? नहीं,हरगिज नहीं! बात नशे की हो या गलत आचरण की,चरित्र और सम्बन्धों में यायावरी की इजाज़त नहीं देगा, एक गाइड लाइन, चाहे पुरुष हो या स्त्री ,सभी को निभानी होगी।"
"यानि मुझे भी?"
" हाँ ,तुम्हें भी!"उसके चेहरे की मासूमियत देख वह हँस पड़ी।
"अरे अब तक यहीं खड़े हो,सुना नहीं तुमने? जाओ दो सॉफ्ट ड्रिंक लेकर आओ! अब से गाईड लाईन का निर्वाह करना है. और सुनो, पनीर टिक्का भी साथ में ले आना !"

मौलिक और अप्रकाशित

Views: 816

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by kanta roy on September 4, 2016 at 2:20pm
हृदय से आभार आपका आदरणीया राहिला जी। आप सभी के साथ ने इस जिरह के काबिल बनाया है। :)))
Comment by kanta roy on September 4, 2016 at 2:19pm
जी, आदरणीय विनय सर जी, इन ड्रिंक्स में भी बड़ा भेद होता है। अनायास ही एकदिन इसी बात पर मन में गंथन मंथन शुरू हो चला था जिसके परिणाम स्वरूप इस लघुकथा का सृजन हुआ।
सराहना पाना आपसे मुझको अच्छा लगता है। आभारी हूूँ।
Comment by kanta roy on September 4, 2016 at 2:16pm
कथा के मर्म को समझने के लिये हृदय से आभार आपका आदरणीय आशीष जी।
Comment by kanta roy on August 29, 2016 at 11:14pm
कथा के उद्देश्य व उसके मर्म को समझ मेरा उत्साह बढ़ाने के लिये हृदय से आभारी हूूँ आदरणीय सुशील सरना जी।
Comment by kanta roy on August 29, 2016 at 11:12pm
आभार आपका तहेदिल आदरणीय शहजाद जी कथा पसंदगी के लिये।
Comment by Rahila on August 12, 2016 at 5:27pm
खूब सार्थक ज़िरह थी।रचना काबिले तारीफ़ है आदरणीया कांता दीदी!बहुत, बहुत बधाई ।सादर
Comment by विनय कुमार on August 11, 2016 at 8:27pm

ड्रिंक्स में भी फ़र्क़, बहुत खूब पकड़ा है आपने इस भेद भाव को| बढ़िया रचना, बधाई 

Comment by ASHISH KUMAAR TRIVEDI on August 11, 2016 at 8:03pm
स्त्री स्वतंत्रता अपने व्यक्तित्व की पहचान बनाना है. लेकिन सद्चरित्र सभी के लिए आवश्यक है.
Comment by Sushil Sarna on August 9, 2016 at 8:00pm

आदरणीय स्त्री स्वतंत्रता को आपने अपनी लघुकथा में बहुत सुंदर ढंग से परिभाषित किया है। न केवल स्त्री बल्कि पुरुष के बारे में भी स्वतंत्रता की सीमाओं का सुंदर उल्लेख किया है। इस सामाजिक विषय को सुंदर ढंग से दर्शाने के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें आदरणीया कांता रॉय जी। 

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on August 9, 2016 at 7:08pm
स्वतंत्रता संदर्भित मास में बेहतरीन अनुपम समसामयिक परिदृश्य पर आधारित बढ़िया प्रस्तुति के लिए हृदयतल से बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीया कान्ता राय जी। शीर्षक भी बहुत बढ़िया व सार्थक सटीक है। ये गाइडलाइन्स सोफ्ट/नरम नहीं, स्ट्रिक्ट/ठोस हो, तो बेहतर।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

amita tiwari posted a blog post

गर्भनाल कब कट पाती है किसी की

कहीं भी कोई भी माँ अमर तो नहीं होती एक दिन जाना होता ही है सब की माताओ को फिर भी जानते बूझते भी…See More
7 hours ago
vijay nikore commented on Sushil Sarna's blog post दोहा दशम. . . . . उम्र
"भाई सुशील जी, सारे दोहे जीवन के यथार्थ में डूबे हुए हैं.. हार्दिक बधाई।"
11 hours ago
vijay nikore posted a blog post

प्यार का पतझड़

एक दूसरे में आश्रय खोजतेभावनात्मक अवरोधों के दबाव मेंकभी ऐसा भी तो होता है ...समय समय से रूठ जाता…See More
19 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"प्रारम्भ (दोहे) अंत भला तो सब भला, कहते  सब ये बात। क्या आवश्यक है नहीं, इक अच्छी…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"आदरणीय  जयहिंद रायपुरी जी अच्छा हायकू लिखा है आपने. किन्तु हायकू छोटी रचना है तो एक से अधिक…"
Sunday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"हाइकु प्रारंभ है तो अंत भी हुआ होगा मध्य में क्या था मौलिक एवं अप्रकाशित "
Saturday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"स्वागतम"
Friday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
Apr 8
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद ' जी सादर अभिवादन प्रथम तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ देरी से आने की…"
Apr 7
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा दशम. . . . . उम्र

दोहा दशम् . . . . उम्रठहरी- ठहरी उम्र अब, करती एक सवाल ।कहाँ गई जब जिंदगी, रहती थी खुशहाल ।।यादों…See More
Apr 6
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार। बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। /ये मेरा…"
Apr 3
आशीष यादव added a discussion to the group धार्मिक साहित्य
Thumbnail

चल मन अब गोकुल के धाम

चल मन अब गोकुल के धाम अद्भुत मनहर बाल रूप में मिल जाएंगे श्याम कि चल मन अब……………………….कटि करधनी शीश…See More
Apr 3

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service