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बराबरी का पैमाना /लघुकथा

"स्त्री स्वातंत्र्य दरअसल पितृसत्ता के विरूद्ध संघर्ष और विरोध है। भावनात्मक ,सामाजिक ,शारीरिक और आर्थिक स्तरों पर पितृसत्ता की जकड़न,उनके पाखंडों का उद्घाटन ही हमारा लक्ष्य है" कहते-कहते वह उत्तेजित हो उठी। सहसा उसे भान हुआ, वो अपने ऑफिस केन्टीन में नहीं, रेस्तरां में है।विलास को उसकी ये बातें अच्छी लगती थी लेकिन आजू-बाजू देख वह संकोच से भर उठी। इस विषय पर वह स्वयं को क्यूँ रोक नहीं पाती है?
तभी बेयरा ऑर्डर लेने आ गया।
"तुम बीयर या जिन तो ले सकती हो, मेरा साथ देने के लिये "
" नहीं!"
" क्यों नहीं, लेडिज ड्रिंक है यह दोनों। आजकल तो औरतें खुलकर शराब पीती है। "

" ड्रिंक में भी स्त्री-पुरूष का भेद होता है? "
" हाँ, यह दोनों पेय सॉफ्ट होते है, तुम्हें पीकर देखना चाहिये।"
"नहीं, मै शराब नहीं पीती! नो थैंक्स!"
"कैसी वूमन लिबरेशन वाली हो तुम? "
" लिबरेशन का मतलब शराब पीना हरगिज नहीं है। फिर यह अपनी -अपनी मर्जी की बात होती है।"
"जब पुरुष से समानता का अधिकार की बात करती हो तो सब कुछ पुरुष की तरह ही स्वीकार करो, संकोच नहीं करना चाहिए। "
" गलत काम में संकोच होना ही चाहिये जनाब! क्या स्त्री स्वातंत्र्य चरित्र-हीनता का परिचायक होगा? नहीं,हरगिज नहीं! बात नशे की हो या गलत आचरण की,चरित्र और सम्बन्धों में यायावरी की इजाज़त नहीं देगा, एक गाइड लाइन, चाहे पुरुष हो या स्त्री ,सभी को निभानी होगी।"
"यानि मुझे भी?"
" हाँ ,तुम्हें भी!"उसके चेहरे की मासूमियत देख वह हँस पड़ी।
"अरे अब तक यहीं खड़े हो,सुना नहीं तुमने? जाओ दो सॉफ्ट ड्रिंक लेकर आओ! अब से गाईड लाईन का निर्वाह करना है. और सुनो, पनीर टिक्का भी साथ में ले आना !"

मौलिक और अप्रकाशित

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Comment by kanta roy on September 4, 2016 at 2:20pm
हृदय से आभार आपका आदरणीया राहिला जी। आप सभी के साथ ने इस जिरह के काबिल बनाया है। :)))
Comment by kanta roy on September 4, 2016 at 2:19pm
जी, आदरणीय विनय सर जी, इन ड्रिंक्स में भी बड़ा भेद होता है। अनायास ही एकदिन इसी बात पर मन में गंथन मंथन शुरू हो चला था जिसके परिणाम स्वरूप इस लघुकथा का सृजन हुआ।
सराहना पाना आपसे मुझको अच्छा लगता है। आभारी हूूँ।
Comment by kanta roy on September 4, 2016 at 2:16pm
कथा के मर्म को समझने के लिये हृदय से आभार आपका आदरणीय आशीष जी।
Comment by kanta roy on August 29, 2016 at 11:14pm
कथा के उद्देश्य व उसके मर्म को समझ मेरा उत्साह बढ़ाने के लिये हृदय से आभारी हूूँ आदरणीय सुशील सरना जी।
Comment by kanta roy on August 29, 2016 at 11:12pm
आभार आपका तहेदिल आदरणीय शहजाद जी कथा पसंदगी के लिये।
Comment by Rahila on August 12, 2016 at 5:27pm
खूब सार्थक ज़िरह थी।रचना काबिले तारीफ़ है आदरणीया कांता दीदी!बहुत, बहुत बधाई ।सादर
Comment by विनय कुमार on August 11, 2016 at 8:27pm

ड्रिंक्स में भी फ़र्क़, बहुत खूब पकड़ा है आपने इस भेद भाव को| बढ़िया रचना, बधाई 

Comment by ASHISH KUMAAR TRIVEDI on August 11, 2016 at 8:03pm
स्त्री स्वतंत्रता अपने व्यक्तित्व की पहचान बनाना है. लेकिन सद्चरित्र सभी के लिए आवश्यक है.
Comment by Sushil Sarna on August 9, 2016 at 8:00pm

आदरणीय स्त्री स्वतंत्रता को आपने अपनी लघुकथा में बहुत सुंदर ढंग से परिभाषित किया है। न केवल स्त्री बल्कि पुरुष के बारे में भी स्वतंत्रता की सीमाओं का सुंदर उल्लेख किया है। इस सामाजिक विषय को सुंदर ढंग से दर्शाने के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें आदरणीया कांता रॉय जी। 

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on August 9, 2016 at 7:08pm
स्वतंत्रता संदर्भित मास में बेहतरीन अनुपम समसामयिक परिदृश्य पर आधारित बढ़िया प्रस्तुति के लिए हृदयतल से बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीया कान्ता राय जी। शीर्षक भी बहुत बढ़िया व सार्थक सटीक है। ये गाइडलाइन्स सोफ्ट/नरम नहीं, स्ट्रिक्ट/ठोस हो, तो बेहतर।

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