Comment
आदरणीय सुनील जी . गाँव का चित्रण ..हमारे शानदार अतीत का चित्रण ..आज जिसे हम तरक्की कहते हैं उसमे हमने बहुत कुछ खो दिया है ..इस बखूबी से किये गए अतीत के चित्रण के लिए ढेर सारी शुभकामनायें सादर
आदरणीय सुनील प्रसाद जी सादर, यह निर्विवाद सत्य है कि हमारी संस्कृति और सभ्यता की झलक हमें गाँव में ही देखने को मिलती है भले ही आज के शहरी जीवन के तुलना में ग्रामीण जीवन की रफ्तार कम हो किन्तु आज के समाज की मानसिकता के कारण हमारी संस्कृति और सभ्यता गाँव से धीरे धीरे ओझल हो रही है जिसकी टीस आपकी इस सुन्दर कविता के माध्यम से ध्वनित होती है. इस सुन्दर रचना हेतु तथा महीने के सर्वश्रेष्ठ रचनाकार चुने जाने के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें आदरणीय
आदरणीय सुनील प्रसाद शाहाबादी जी सादर, बहुत सुंदर कथ्य लिया है आपने. कुछ त्रुटियों के बावजूद रचना में सम्मोहन बना हुआ है.बहुत सुंदर प्रस्तुति. बहुत-बहुत बधाई. सादर.
गँउवे क दशा बखानत राउर रचना अउर महीना क सर्वश्रेष्ठ रचना के खातिर बधाई ।
एक अच्छी कविता के लिए हार्दिक बधाई, आदरणीय सुनील जी.. भाव पक्ष का आत्मीय विस्फोट इस प्रस्तुति को अद्वितीय बना रहा है. किन्तु, इसीके साथ वर्तनी अशुद्धियाँ भी हैं जो खटकती हैं. अवश्य ये टंकण त्रुटियाँ हैं. सुधार कर लें.
हार्दिक शुभकामनाएँ
आवश्यक सूचना:-
1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे
2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |
3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |
4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)
5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |
© 2024 Created by Admin. Powered by
महत्वपूर्ण लिंक्स :- ग़ज़ल की कक्षा ग़ज़ल की बातें ग़ज़ल से सम्बंधित शब्द और उनके अर्थ रदीफ़ काफ़िया बहर परिचय और मात्रा गणना बहर के भेद व तकतीअ
ओपन बुक्स ऑनलाइन डाट कॉम साहित्यकारों व पाठकों का एक साझा मंच है, इस मंच पर प्रकाशित सभी लेख, रचनाएँ और विचार उनकी निजी सम्पत्ति हैं जिससे सहमत होना ओबीओ प्रबन्धन के लिये आवश्यक नहीं है | लेखक या प्रबन्धन की अनुमति के बिना ओबीओ पर प्रकाशित सामग्रियों का किसी भी रूप में प्रयोग करना वर्जित है |
You need to be a member of Open Books Online to add comments!
Join Open Books Online