For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

( बेवजह भौंकनेवालों को संबोधित)
रमल मुरब्बा सालिम
2122 2122
***
देख ढ़ेर बवाल मत कर
दोहरी अब चाल मत कर।1

रंग देख हँसे जमाना,
गिरगिटों-सा हाल मत कर।2

हैं सियारों-सी अदाएँ,
शेर वाली खाल मत कर।3

जो लड़ाई लड़ रहा उस
शस्त्र को वाचाल मत कर।4

कर रहा कुछ खुद नहीं तू,
भौंक कर अब ढ़ाल मत कर।5

बुझ गयीं कितनी मशालें,
और अब पामाल मत कर।6

श्वान भी सीमा बचाते,
भौंक,पर बेताल मत कर।7

सींचना संभव नहीं तो,
पेड़ को बेडाल मत कर।8

पूछ ले खुद से कभी तू,
और आज सवाल मत कर।9
मौलिक व अप्रकाशित@मनन

Views: 549

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Manan Kumar singh on October 10, 2016 at 7:47pm
आभार आपका आ. राजेश जी।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 10, 2016 at 5:46pm

देख ढ़ेर  --इसको २१२२ में आपने कैसे बांधा आद० मनन जी देख ढेर की मात्राएँ २१२१ होंगी और बबाल की १२१ 

२१२२ में २ को ११ करने की छूट नहीं होती 

वैसे भी जो  आपने  लिखी  है  वो  बह्र -रमल मुरब्बा सालिम है 

इस हिसाब से आपके कई मिसरे बेबह्र हो  रहे हैं

आद० समर भाई जी का ध्यान इस और पता नही क्यूँ नही गया | 

जो लड़ाई लड़ रहा उस
शस्त्र को वाचाल मत कर।4---बहुत  खूब  बस इसी तरह हर मिसरे को बांधना है 

Comment by Manan Kumar singh on October 9, 2016 at 5:10am
आदरणीय सुरेश जी, आपका बहुत बहुत आभार।
Comment by Manan Kumar singh on October 9, 2016 at 5:08am
जनाब समर जी हौसला आफजाई के लिए दिली शुक्रिया कुबूल करें,आदाब!
Comment by Manan Kumar singh on October 9, 2016 at 5:07am
आभार आपका आदरणीय सुशील सरना जी।
Comment by सुरेश कुमार 'कल्याण' on October 8, 2016 at 7:59pm
आदरणीय मनन कुमार जी मौजूदा स्थिति को दर्शाती सुन्दर रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें । सादर ।
Comment by Samar kabeer on October 8, 2016 at 5:16pm
जनाब मनन कुमार जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं ।
Comment by Sushil Sarna on October 8, 2016 at 12:34pm

श्वान भी सीमा बचाते,
भौंक,पर बेताल मत कर।7

वर्तमान स्थिति के अनुरूप इस बेहतरीन ग़ज़ल की प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय मनन जी।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार। बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। /ये मेरा…"
Friday
आशीष यादव added a discussion to the group धार्मिक साहित्य
Thumbnail

चल मन अब गोकुल के धाम

चल मन अब गोकुल के धाम अद्भुत मनहर बाल रूप में मिल जाएंगे श्याम कि चल मन अब……………………….कटि करधनी शीश…See More
Friday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अशोक भाईजी धन्यवाद ... मेरा प्रयास  सफल हुआ।"
Tuesday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह वाह वाह !!! बहुत दिनों बाद ऐसी लाजवाब प्रतिक्रिया पढने में आई है। कांउटर अटैक ॥ हजारों धन्यवाद…"
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय शेख शाहज़ाद उस्मानी जी सादर, सरकारी शालाओं की गलत परम्परा की ओर ध्यान आकृष्ट कराती…"
Tuesday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"सार्थक है आपका सुझाव "
Tuesday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ रचना पटल पर उपस्थिति और समीक्षाओं हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी। मेरी…"
Tuesday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभाजी ।  इसमें कुछ कमी हो सकती है लेकिन इस प्रकार के आयोजन शहरों…"
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, बिना सोचे बोलने के परिणाम पर सुन्दर और संतुलित लघुकथा…"
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"अमराई में उत्सव छाया,कोयल को न्यौता भिजवाया। मौसम बदले कपड़े -लत्ते, लगे झूमने पत्ते-…"
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"ठण्ड गई तो फागुन आया। जन मानस में खुशियाँ लाया॥ आम  लगे सब हैं बौराने। पंछी गाते सुर में…"
Tuesday
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"लघुकथा किसी विसंगति से उभरती है और अपने पीछे पाठको के पीछे एक प्रश्न छोड़ जाती है। सबकुछ खुलकर…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service