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कविता :"विजयादशमी " - अर्पणा शर्मा, भोपाल

हम सब कठपुतलें हैं,
करते परंपरागत दहन,
रावण के पुतलों का,
मनाते पर्व विजय का,
पर छुपे हुए रावण,
हर जगह फैलें हैं,
ऊपर से उल्लासित हम,
भीतर से त्रस्त और खोखले हैं,
आतंक,दुराचार,विभीषिकाओं के,
भीषण दौर इस विश्व में,
सभी धर्मों, सभ्यताओं,
और समाजों ने झेले हैं,
छुपी हुई दुराचारी,
अहंकारी मनोवृत्ति के,
आतंक और भ्रष्टाचार के,
युद्ध और विनाश के,
अशिक्षा और दरिद्रता के,
इन रावणों का दहन करने,
हे राम तुम्हें,
फिर अवतरित होना होगा,
असत्य पर सत्य की,
बुराई पर अच्छाई की,
परंपरा को विजय की,
स्थापित पुनः करना होगा,
सही अर्थों में तभी,
यह विजय पर्व मनेगा...!!"
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Arpana Sharma on October 17, 2016 at 10:44pm
आपकी सराहना के लिए धन्यवाद आदरणीया अलका ललित जी।
Comment by Arpana Sharma on October 15, 2016 at 8:57pm
आपकी सराहना का बहुत धन्यवाद आ. श्रीमान् सुरेश कल्याण जी एवं आदरणीया अलका चंगा जी।
Comment by सुरेश कुमार 'कल्याण' on October 15, 2016 at 8:09pm
आदरणीया अर्पणा शर्मा जी सुन्दर भावपूर्ण रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें । सादर ।
Comment by अलका 'कृष्णांशी' on October 14, 2016 at 4:27pm

बहुत सुंदर रचना।  बहुत बधाई अर्पणा जी

Comment by Arpana Sharma on October 13, 2016 at 10:53pm
आदरणीया राजेश कुमारी जी, श्रीमान् Vijay nikore ji, श्रीमान् रामबली गुप्ता जी, आदरणीया कल्पना भट्ट जी - मेरी कविता हेतु आप सभी की सराहना का बहुत धन्यवाद ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 13, 2016 at 10:21pm

सुन्दर संदेशपरक सार्थक रचना बहुत बहुत बधाई अर्पणा जी |

Comment by vijay nikore on October 13, 2016 at 3:27pm

बहुत ही सुंदर रचना। बधाई।

Comment by रामबली गुप्ता on October 12, 2016 at 10:39am
वाह वाह शानदार रचना हुई है आदरेया। दिल से बधाई लीजिये।
Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on October 12, 2016 at 7:13am
प्यारी रचना । बहुत बहुत बधाई ।
Comment by Arpana Sharma on October 11, 2016 at 7:34pm
आदरणीय श्रीमान् बासुदेव अग्रवाल नमन जी- बहुत धन्यवाद एवं विजयादशमी की सपरिवार शुभकामनाएँ

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