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मैं भी गलती करता हूँ (तरही गजल)

बह्र 22 22 22 2

हाड़ मास का पुतला हूँ
मैं भी गलती करता हूँ ||

बच्चों को फुसलाने में
दिल रोये पर हँसता हूँ ||

जाति धर्म के बीच फँसी
लोक तंत्र की जनता हूँ||

सीख न पाया मैं लहजा
यूँ तो ग़ज़लें कहता हूँ ||

जीवन नश्वर है फिर भी
आशाओं पर जीता हूँ ||

अंक गणित सा जीवन है
गुणा भाग में उलझा हूँ ||

साथ लिए  इक ख़ालीपन
"अपनी धुन में रहता हूँ ||"


(मौलिक व अप्रकाशित)'₹

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Comment by narendrasinh chauhan on February 20, 2017 at 6:14pm

खुब सुन्दर रचना

Comment by Gurpreet Singh jammu on February 20, 2017 at 2:24pm

आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह जी ,,, बहुत बढ़िया ग़ज़ल कही है आपने,,,
हाड़ मास का पुतला हूँ
मैं भी गलती करता हूँ ||
बहुत बढ़िया मतले से शुरुआत हुई है ग़ज़ल की...
अंक गणित सा जीवन है
गुणा भाग में उलझा हूँ ||
यह शेअर भी बहुत पसंद आया,,, बहुत बधाई आपको

Comment by Samar kabeer on February 20, 2017 at 2:06pm
जनाब सुरेन्द्र नाथ सिंह जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on February 20, 2017 at 12:05pm

बेहतरीन आ. सुरेंद्रनाथ जी बहुत बहुत बधाई इस लाजवाब ग़ज़ल के लिए

Comment by नाथ सोनांचली on February 20, 2017 at 6:18am
आद0 मोहम्मद आरिफ जी गजल में गहराई से शिरकत करने और हौसला अफजाई के लिए आभार
Comment by Mohammed Arif on February 19, 2017 at 4:32pm
आदरणीय सुरेन्द्रनाथ जी आदाब, बहुत उम्दा ग़ज़ल । दिली मुबारक़बाद क़ुबूल कीजिए ।

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