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"तुमने कहा था भूल जा"

लौकिक अनाम छंद 
221 2121 1221 212

तुमने कहा था भूल जा तुमको भुला दिया |
जीना कठिन हुआ भले' जीके दिखा दिया |

.

अब और कुछ न माँग बचा कुछ भी तो नहीं
इक दम था इन रगों में जो तुम पर लुटा दिया |

.

जो रात दिन थे साथ में वही छोड़ कर गये
था मोह का तमस जो सघन वो मिटा दिया |

.

अब चैन से निकल तिरे जालिम जहान से
कोई कहीं न रोक ले कुंडा लगा दिया |

.

धक धक धड़क गया बड़ा नाजुक था  मेंरा दिल 
नश्तर बहुत था तेज जो उसने चुभा दिया |

.

(मौलिक अप्रकाशित)

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Comment

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Comment by Chhaya Shukla on May 6, 2017 at 10:06am

मोहतरम जनाब समर कबीर जी शुक्रिया आपका सादर |

Comment by Chhaya Shukla on May 6, 2017 at 10:04am

आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह "कुशक्षत्रप" जी आपकी सराहाना का बहुत बहुत आभार ! कृपया स्नेह बनाये रखें |

Comment by नाथ सोनांचली on May 5, 2017 at 3:44am
त्रुटि सुधार, ग़ज़ल का उम्दा प्रयास पर आपको बधाई।
Comment by नाथ सोनांचली on May 5, 2017 at 3:44am
आद0 छाया शुक्ला जी सादर अभिवादन, हजल का उम्दा प्रयास, बधाई।
Comment by Samar kabeer on May 4, 2017 at 12:32pm
मोहतरमा छाया शुक्ला जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा हुआ है,इसके लिये बधाई स्वीकार करें ।
बाक़ी जनाब निलेश जी बता ही चुके हैं ।
Comment by Chhaya Shukla on May 3, 2017 at 10:46pm

आदरणीय निलेश जी आपका सुझाव महत्व पूर्ण है | कृपया स्नेह बनाये रखें | पुनः नमन 

Comment by Chhaya Shukla on May 3, 2017 at 10:44pm

जी, आदरणीय  mohammed arif जी आपकी उपस्थिति का स्वागत है | सराहना के लियी आभार आपका | 

Comment by Chhaya Shukla on May 3, 2017 at 10:43pm

आदरणीय nilesh shevgaonkar जी आपकी उपस्थिति को नमन 
मेरी शंका का समाधान हुआ अच्छा लगा | कृपया साथ में संशोधन भी दिया जाता  तो सुंदर होता | हृदय से आभार आपका | संशोधन का प्रयास होगा | 
जय माँ शारदे ! 

Comment by Mohammed Arif on May 3, 2017 at 9:39pm
आदरणीया छाया जी आदाब, अच्छा प्रयास । बधाई स्वीकार करें । आदरणीय नीलेश जी की बातों पर ध्यान दें ।
Comment by Nilesh Shevgaonkar on May 3, 2017 at 4:01pm

आ. छाया जी,
आपकी प्रस्तुति का  स्वागत है ...
.
अव्वल तो ये विधा ग़ज़ल   है..गीतिका नहीं... 
कुछ लोग बे-वजह इसे गीतिका नाम देकर इसका हिंदी करण करने पर आमादा हैं जिस का विरोध किया जाना चाहिए.
.
मतले के सानी मिसरे में पर को 11 में नहीं बाँधा जा सकता, वो 2 ही रहेगा ..इसी तरह चल भी 11 नहीं होगा अत: ये दोनों मिसरे बहर में नहीं हैं ..
जान स्त्रीलिंग है अत: लुटा दी आयेगा ..लुटा दिया कहाँ ग़लत है ...
कहन पर काम करते रहिये ....और अच्छी ग़ज़लें पढ़िये तो कहन अपने आप बेहतर होगा ...
सादर 

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