For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल--शम अ रोशन करो मुहब्बत की

ग़ज़ल
-----
(फ़ाइलातुन -मफ़ाइलुंन -फेलुंन)

आँधियाँ चल रही हैं नफ़रत की।
शमअ रोशन करो मुहब्बत की।

जिसको तदबीर पर यक़ीन नहीं
बात करता है वह ही किस्मत की।

दुश्मने जान हो गए उमरा
में ने मुफ़लिस की जब हिमायत की।

रहबरी के लिए चुना जिसको
साथ उसने मेरे सियासत की।

होश में आ जा बागबाने चमन
हो गई इब्तदा बग़ावत की।

उनके जलवों से वह नहीं वाकिफ़
बात करते हैं जो कियामत की।

वक़्त तस्दीक़ इम्तहान का है
राह मत छोड़ना सदाक़त की।

(मौलिक व अप्रकाशित )

Views: 866

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on May 20, 2017 at 9:04pm
मुहतरम गुरप्रीत सिंह साहिब,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफजाई का बहुत बहुत शुक्रिया,---उमरा का मतलब है ,अमीर लोग, यह अमीर का बहुवचन है
Comment by Nilesh Shevgaonkar on May 20, 2017 at 1:25pm

आ. तस्दीक अहमद साहब,

अच्छी  ग़ज़ल हुई है ..
दो मिसरों में तनाफुर का    ऐब नुमायाँ है ..
.
जिसको तदबीर पर यक़ीन नहीं
जिन को तदबीर पर नहीं है यकीं ...
.
क़्त तस्दीक़ इम्तहान का है
वक़्त  है इम्तहान का स्दीक़
.
कियामत को क़ियामत कर लें ... सादर 

Comment by Sushil Sarna on May 20, 2017 at 12:45pm

आदरणीय तस्दीक साहिब इस दिलकश ग़ज़ल के लिए दिल से मुबारकबाद कबूल फरमाएं सर। 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 20, 2017 at 11:48am

आ. भाई तस्दीक अहमद जी , इस सुंदर गजल के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें।

Comment by Gurpreet Singh jammu on May 20, 2017 at 11:12am
वाह वाह आदरणीय तस्दीक जी बहुत उम्दा ग़ज़ल कही है आपने उमरा का अर्थ जानना चाहूंगा
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on May 20, 2017 at 10:45am
मुहतरम जनाब आरिफ साहिब आदाब, ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया
Comment by Mohammed Arif on May 20, 2017 at 10:31am
आदरणीय तस्दीक़ अहमद जी आदाब, हर शे'र उम्दा । दिली मुबारकबाद क़ुबूल करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15
जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
Aug 10
Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Aug 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
Aug 3
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service