For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कागज़ की नाव :कहानी

“यार अच्छी-खासी नौकरी है तुम्हारी ये दिन रात इंटरनेट और मोबाइल पर क्या खेल खेलते रहते हो, थोड़ा हम लोगों के पास भी बैठा करो, पिता ने बड़ी ही मित्रतापूर्वक भाव से ‘आनंद’ से पूछा !

आनंद ने अपना लैपटॉप बंद करते हुए बड़े ही सहज भाव से कहा “कुछ नहीं पिताजी आपकी समझ से बाहर है यह सब, जब मैं बड़ा आदमी बन जाऊँगा तब आपको अपने आप पता चल जाएगा !”

पिता अपना सा मुहँ लेकर खामोश हो गए तभी आनंद की माँ आ गईं और उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, बेटा सबकुछ तो ठीक चल रहा है, अच्छी खासी तन्खाव्ह है तुम्हारी, हम भी तुम से कुछ अपेक्षा नहीं करते, बस तुम्हारी शादी हो जाए तो मैं और तुम्हारे पिता भी गंगा नहा आयें !

शादी का नाम सुनते ही आनंद भड़क गया और कहने लगा “आप दोनों बस शादी के पीछे पड़े रहो, इसके अलावा कोई काम तो है नहीं आप दोनों को !”

बेटे का इस तरह का व्यवहार देखकर दोनों एक दुसरे का मुहं देखने लगे और चुपचाप अपने कमरे में चले गए !

समय बीतता गया, इधर आनंद अपने उसी ढर्रे में लगा रहा और एक दिन अचानक ख़ुशी से अपने पिता और माँ के गले लगकर बोला “लो आज आपका बेटा करोड़पति बन गया है !” माँ की ख़ुशी का तो कोई ठिकाना ही नहीं था पर पिता के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आयीं !  उन्होंने पूछ ही लिया “आनंद ये कैसे हुआ? कुछ बताओगे तुम?”

आनंद ने कहा “आप लगता है मुझ पर शक कर रहें है?” तो आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि मैंने ये सारा पैसा शेयर बाजार से कमाया है !

वो तो ठीक है बेटा पर बाजार में लगाने के लिए तुम्हारे पास पैसा आया कहाँ से? “पिता ने कुछ ज्यादा ही ऊँची आवाज में पूछ लिया !”

अब आनंद ने सब कुछ सच ही बताना उचित समझा ,उसने बताया कि किस तरह उसने अपनी सैलरी ,बैंकों से पर्सनल लोन और अपने दोस्तों से उधार पैसे ले-लेकर शेयर बाजार में पैसा लगाया और आज उन शेयरों का मूल्य १ करोड़ से भी ज्यादा हो गया था !

इतना सुनते ही माँ ने चहकते हुए कहा “आप तो बेकार में ही मेरे बेटे पर शक कर रहे हो” पर आनंद के पिता ने उन्हें बीच में ही डांटकर चुप करा दिया और आनंद को टोकते हुए कहा “आनंद आज ही अपने सारे शेयर बेच दे और इस कागज़ की नाव की सवारी बंद कर बाहर निकल आ, जिसका जितना लिया है उतना वापस कर दे !”

“वापस कर दूं ? आपका दिमाग खराब हो गया है क्या?” अभी तो बाजार चढ़ रहा है, देखना आप में कैसे इस १ करोड़ को २ करोड़ में बदलता हूँ ! माँ ने भी आनंद कि बात का समर्थन किया और कहने लगी, “अरे आप भी न ,कुछ पता-वता तो है नहीं आपको, अरे सही तो कर रहा है मेरा लाल !”

पिता चुप हो गए, दिन बीतते गए और एक दिन आनंद के चेहरे पर हवाइयां उड़ते देख उन्होंने पूछ ही लिया “क्या बात है आनंद इतने परेशान क्यों दिख रहे हो?”

आनंद फफककर रोने लगा और उसने बताया कि कैसे १ का २ बनाने के चक्कर में वो लगा रहा और बाजार की गिरावट की मार उस पर कैसे पड़ी , कैसे बैंकों और दोस्तों ने, उससे अपना कर्जा मांगने के लिए उस पर दबाव बनाया और कैसे आज वो ५७ लाख के क़र्ज़ के नीचे दबा पड़ा था, और कैसे क़र्ज़ चुकाने के लिए उसने अपनी माँ के गहने तक गिरवी रख दिए थे !

पिता सन्न रह गए, इधर आनंद कि माँ भी मुहं लटका कर चुपचाप आँसूं बहा रहीं थी !

पिता थोडा सा नर्वस जरूर हुए पर चेहरे पर झूठी मुस्कान लाते हुए बोले, “चलो कोई बात नहीं, जो बीत गयी सो बात गयी ” अपना वो नॉएडा वाला मकान तो इससे ज्यादा में बिक ही जाएगा,वैसे भी खाली ही पड़ा रहता है आजकल, पर तुम दोनों मगर कसम खाओ आज से मेरा कहना मानोगे, अब अश्रुपूरित माँ और बेटे उनके चरणों में पड़े थे ! पिता ने माहौल को हल्का करने के लिए डीवीडी पर गाने चला दिए, और तभी एक गाना बज उठा “वो कागज़ की नाव तुम्हारी कहो जफ़र कैसे डूबी , तुम तो यार बड़े माहिर थे ऐसी नाव चलानें में...!!

© हरि प्रकाश दुबे

“मौलिक एवम् अप्रकाशित 

Views: 1186

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Hari Prakash Dubey on June 26, 2017 at 12:23am

 बहुत शुक्रिया आपका आदरणीय  सुनील प्रसाद(शाहाबादी) जी ! सादर 

Comment by Hari Prakash Dubey on June 26, 2017 at 12:22am

आदरणीय  बृजेश कुमार 'ब्रज जी ,रचना पर आपके समर्थन के लिए आपका आभार ! सादर 

Comment by Hari Prakash Dubey on June 26, 2017 at 12:20am

आदरणीय  डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव सर ,आपकी सीख से काफी कुछ समझ आ गया है , पुनः ध्यान मैं रखकर ही रचना पोस्ट करूँगा ! सादर 

Comment by Hari Prakash Dubey on June 26, 2017 at 12:17am

आदरणीया  rajesh kumari जी ,हार्दिक आभार आपका ,आपकी बातों को संज्ञान में लेते हुए  इसे कहानी की श्रेणी मैं ही रख दिया है ,पुनः आभार आपका ! सादर 

Comment by Hari Prakash Dubey on June 26, 2017 at 12:13am

सहमत आदरणीय  Ravi Prabhakar सर ! सादर

Comment by सुनील प्रसाद(शाहाबादी) on June 24, 2017 at 2:34pm
सुन्दर सार्थक संदेश देती कथा।
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on June 23, 2017 at 11:29pm
बहुत ही शानदार ढंग से गहरे भाबो का चित्रण किया है ..सादर बधाई
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 23, 2017 at 10:25pm

आ०  दीदी  श्री ने जो कहा , उसे धान में रखिये , नाटक में सबसे छोटा एकांकी होता है उस एक अंक में कुछ दृश्य होते है   लघु कथा भी बस एक दृश्य ही है . सादर .


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 18, 2017 at 8:39pm

एक सच्चा सार्थक सन्देश दे रही है ये कहानी बहुत अच्छी है किन्तु ये लघु कथा की श्रेणी में नहीं आएगी इसमें बहुत से काल खंड हैं इसे कहानी की श्रेणी में रख सकते हैं .बहुत बहुत  बधाई आपको .

Comment by Ravi Prabhakar on June 18, 2017 at 11:21am

आदरणीय हरि दुबे भई जी, मुझे यह रचना किसी भी प्रकार से लघुकथा नहीं लगी। सादर

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  उत्साहित बने रहने और सतत चलते रहने के सुझाव से निस्सृत होती सकारात्मकता का आयाम आश्वस्तिकारी…"
yesterday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जब कविता कोश चल सकता है तो ओबीओ क्यूँ नहीं। वहाँ भी शुरू में जो लोग थे आज नहीं हैं। नए-नए लोग…"
Saturday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"चर्चा में आपकी उपस्थिति तथा आपके भावमय शब्दों का स्वागत है आदरणीय मिथिलेश जी. "
Saturday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "प्यारी दुश्मन" -[लघु कथा] (18)
"मेरी इस रचना के अवलोकन हेतु पाठकों को हार्दिक धन्यवाद।"
Friday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "शह और शिकस्त" - [लघुकथा] 25 (शतरंज संदर्भित) - शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"मेरी इस रचना पर 446 अवलोकन हेतु हार्दिक आभार पाठकों के प्रति।"
Friday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post सूरज के तेवर (लघुकथा) [छंदोत्सव-58 चित्र से प्रेरित] /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"रचना पटल पर उपस्थिति, समीक्षात्मक टिप्पणी और सवाल हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया कान्ता रॉय जी। मेरी…"
Friday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" सादर नमस्कार आदरणीय मंच। कुछ अन्य सुझाव: 1- सदस्यों से सहयोग राशि एकत्रित कर ओबीओ की पत्रिका…"
Jun 1
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अच्छा सुझाव"
Jun 1
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रतिष्ठित मंच के सभी सम्माननीय सदस्यों को सादर प्रणाम🙏ओ बी ओ परिवार के समक्ष बनी इस विषम परिस्थिति…"
May 31
Manjeet kaur replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"ओ बी ओ मंच से बहुत कुछ सीखने को मिला इसके बंद होने की खबर दुखद और पीड़ादाई लगी। अजय गुप्ता जी की…"
May 30
Manjeet kaur commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"धर्मेंद्र कुमार जी आज के मुश्किल दौर में इतना जिगरा ! यथार्थ और सटीक वर्णन के लिए बहुत बहुत बधाई"
May 30
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .मंच

दोहा सप्तक. . . . . मंचअभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।यह जग…See More
May 30

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service