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ग़ज़ल (मधुर मास सावन लगा है)

बहर:- 122 122 122

मधुर मास सावन लगा है,
दिवस सोम लगते पड़ा है।

महादेव को सब रिझाएँ,
ये संयोग अद्भुत हुआ है।

तेरा रूप सबसे निराला,
गले सर्प माथे जटा है।

कुसुम बिल्व चन्दन चढ़ाएँ,
ये शुभ फल का अवसर बना है।

शिवाले में अभिषेक जल से,
करें भक्त मोहक छटा है।

करें कावड़ें तुझको अर्पित,
सभी पुण्य पाते महा है।

करो पूर्ण आशा मेरी शिव,
'नमन' हाथ जोड़े खड़ा है।

मौलिक व अप्रकाशित

(भगवान शिव को अर्पित एक मुसलसल ग़ज़ल)

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Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on July 16, 2017 at 4:33pm

बहुत बढ़िया | हार्दिक बधाई आदरणीय |

Comment by Mahendra Kumar on July 12, 2017 at 7:40pm

अच्छी मुसलसल ग़ज़ल है आ. बासुदेव जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. //सभी पुण्य पाते महा है।// मुझे लगता है यहाँ पर रदीफ़ "है" की जगह "हैं" आ रहा है. देख लीजिएगा. सादर.

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on July 12, 2017 at 8:51am
हर हर महादेव..उत्तम ग़ज़ल द्वारा शिव वंदना अनुकरणीय है..सादर
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 11, 2017 at 10:48pm
बहुत खूब हार्दिक बधाई।
Comment by Ravi Shukla on July 11, 2017 at 2:34pm

आदरणीय वासूदेव जी अच्‍छी गजल कही आपने बधाई स्‍वीकार करें

Comment by Samar kabeer on July 11, 2017 at 11:03am
अब ठीक है भाई ।
Comment by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' on July 10, 2017 at 8:28pm
आ0 समर कबीर जी ऐसी इस्लाह आपकी पारखी नज़र से ही मिलती है।
नमन हाथ जोड़े खड़ा है
यह सुधार कर दिया है।
आपका हृदय से आभार।
Comment by Samar kabeer on July 10, 2017 at 6:30pm
जनाब बासुदेव अग्रवाल'नमन'जी आदाब,उम्दा ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।
मक़्ते में शुतरगुर्बा दोष है,ऊला मिसरे में 'करो'और सानी मिसरे में 'तेरे',देखियेगा ।
Comment by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' on July 10, 2017 at 4:29pm
मोहम्मद आरिफ साहिब आपने ग़ज़ल में शिरकत कर हौसला आफजाई की आपका तहे दिल से शुक्रिया।
Comment by Mohammed Arif on July 10, 2017 at 2:08pm
आदरणीय वासुदेव जी आदाब, बेतरीन सावन की छटा को रेखांकित करती ग़ज़ल । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

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