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ग़ज़ल - रोशनी है अगर तेरे दिल में- ( गिरिराज भंडारी )

2122  1212   112/22

गर अँधेरा है तेरी महफिल में

हसरत ए रोशनी तो रख दिल में

खुद से बेहतर वो कैसे समझेगा ?

सारे झूठे हैं चश्म ए बातिल में

क़त्ल करने की ख़्वाहिशों के सिवा

और क्या ढूँढते हो क़ातिल में

 

बेबसी, दर्द और कुछ तड़पन

क्या ये काफी नहीं था बिस्मिल में ?

 

फ़िक्र क्या ? बाहरी जिया न मिले

रोशनी है अगर तेरे दिल में

 

कोई तो कोशिश ए नजात भी हो

अश्क़ बारी के सिवा मुश्किल में

 

साहिलों सा नही है साहिल अब

कोई तूफाँ छिपा है साहिल में

 

प्यार का क्या सबूत दूँ उनको

ज़ह’न के जो बसे हैं तिल तिल में

 

हर तगाफ़ुल मिला जो तुमसे मुझे

जुड़ गया ज़िन्दगी के हासिल में      

*************************

मौलिक एवँ अप्रकाशित

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Comment by अलका 'कृष्णांशी' on August 10, 2017 at 3:42pm

आदरणीय गिरिराज भंडारी जी, बेहद खूबसूरत गजल के लिए बहुत बधाई । सादर  ।

Comment by नाथ सोनांचली on August 10, 2017 at 3:20pm
आद0 गिरिराज भाई जी सादर अभिवादन, बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल कहीं आपने, कुछ अशआर तो सीधे दिल मे उतरते है। आपको अशेष बधाइयाँ निवेदित हैं। सादर

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 10, 2017 at 2:11pm

आदरनीय आशीष भाई , आपको ओबीओ मे देख कर सुखद अनुभूति हुई ... स्वागत है आपका । गज़ल की सराहना के लिये आपका हृदय से बधाइयाँ ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 10, 2017 at 2:09pm

आदरनीय अरुण भाई , आपको फिर से सक्रिय देख कर अच्छा लगा । ग़ज़ल की सराहना के लिये आपका हार्दिक आभार ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 10, 2017 at 2:07pm

आदरणीय रवि भाई , उत्साह वर्धन के लिये आपका हृदय से आभार ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 10, 2017 at 2:07pm

आ. मो. आरिफ भाई , गज़ल की सराहना के ल्लिये आपका हार्दिक आभार ।

Comment by Ashish shrivastava on August 10, 2017 at 2:01pm
आदरणीय गिरिराज जी , आदाब ।
बहुत अच्छी ग़ज़ल कही आपने । हमारी ओर से बहुत बहुत मुबारकबाद।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by अरुण कुमार निगम on August 10, 2017 at 1:20pm

आदरणीय गिरिराज जी, बेहद खूबसूरत गजल. बधाइयाँ. 

साहिलों सा नही है साहिल अब

कोई तूफाँ छिपा है साहिल में.........ख़ास दाद कबूल कीजिये.

Comment by Ravi Shukla on August 10, 2017 at 11:34am

आदरणीय गिरिराज भाई जी  बहुत बढि़या गजल कही आपने मुबारक बाद पेश है । सादर

Comment by Mohammed Arif on August 10, 2017 at 11:13am
आलरणीय गिरिराज भंडारी जी आदाब, बहुत ही बढ़िया ग़ज़ल । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद । बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे । सादर ।

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