For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल - अब हक़ीकत से ही बहल जायें ( गिरिराज भंडारी )

2122  1212   22 /122
मंज़रे ख़्वाब से निकल जायें

अब हक़ीकत से ही बहल जायें

 

ज़ख़्म को खोद कुछ बड़ा कीजे

ता कि कुछ कैमरे दहल जायें

 

तख़्त की सीढ़ियाँ नई हैं अब

कोई कह दे उन्हें, सँभल जायें

 

मेरे अन्दर का बच्चा कहता है  

चल न झूठे सही, फिसल जायें

 

शह’र की भीड़ भाड़ से बचते

आ ! किसी गाँव तक निकल जायें

 

दूर है गर समर ज़रा तुमसे

थोड़ा पंजों के बल उछल जायें

 

चाहत ए रोशनी में दम है अगर

जुगनुओं की तरह से जल जायें   

*****************************

मौलिक एवँ अप्रकाशित

Views: 329

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by vandana on October 15, 2017 at 3:49pm

ज़ख़्म को खोद कुछ बड़ा कीजे

ता कि कुछ कैमरे दहल जायें

बहुत ग़ज़ब का व्यंग्य बहुत बढ़िया ग़ज़ल आदरणीय 

Comment by Ajay Tiwari on October 15, 2017 at 10:19am

आदरणीय गिरिराज जी,
उम्दा ग़ज़ल हुई है. शुभकामनाएं.
सादर

Comment by रामबली गुप्ता on September 26, 2017 at 5:45pm
वाह वाह आदरणीय गिरिराज भाई बहुत ही शानदार ग़ज़ल हुई है। दिल से बधाई स्वीकार करें।सादर
Comment by Dr Ashutosh Mishra on September 26, 2017 at 3:31pm

तख़्त की सीढ़ियाँ नई हैं अब

कोई कह दे उन्हें, सँभल जायें

तख़्त की सीढ़ियाँ नई हैं अब

कोई कह दे उन्हें, सँभल जायें

आदरणीय गिरिराज भाई साब इस ग़ज़ल के इन शेरो ने तो मन मोह लिया ..बहुत ही शानदार रचना पर आपको हार्दिक बधाई सादर 

Comment by Afroz 'sahr' on September 14, 2017 at 4:08pm
आदरणीय गिरीराज भंडारी जी सुंदर रचना है!बधाई स्वीकार करें!
Comment by Ravindra Pandey on September 9, 2017 at 2:58pm

वाह... शानदार..


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 30, 2017 at 9:21am

आदरनीय अजय भाई , हौसला अफज़ाई का तहे दिल से शुक्रिया ।

Comment by ajay sharma on August 28, 2017 at 11:52pm

great sir ji


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 28, 2017 at 9:43pm

आदरनीय राम अवध भाई , उत्साह वर्धन के लिये आपका हृदय से आभार ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 28, 2017 at 9:42pm

आदरनीय लक्ष्मण भाई , गज़ल की सराहना के लिये आभार आपका ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

डॉ छोटेलाल सिंह commented on Pradeep Devisharan Bhatt's blog post "तारतम्यता"
"उम्दा भाव के साथ सुंदर सृजन का प्रयास किया है आदरण…"
12 minutes ago
Samar kabeer commented on Harihar Jha's blog post अच्छे दिन थे
"मुझे भी यही एक कविता नज़र आ रही है आपकी ।"
14 minutes ago
डॉ छोटेलाल सिंह commented on rajesh kumari's blog post नाभी में लेकर कस्तूरी  तय करता मृग कितनी दूरी (गीत राज )
"आदरणीया राजेश कुमारी जी बहुत ही उम्दा भाव के साथ ग…"
16 minutes ago
डॉ छोटेलाल सिंह commented on santosh khirwadkar's blog post बीते लम्हों को चलो .....संतोष
"आदरणीय सन्तोष जी उम्दा भाव के साथ आकर्षक पंक्तियां आपने…"
19 minutes ago
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post ईमान- लघुकथा
"बहुत बहुत आभार आ मिर्ज़ा जावेद बेग जी"
1 hour ago
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post ईमान- लघुकथा
"बहुत बहुत आभार आ तेज वीर सिंह जी"
1 hour ago
Dr Ashutosh Mishra commented on Dr Ashutosh Mishra's blog post सौदागर
"आदरणीय लक्ष्मण जी आदरणीय समर सर , भाई ब्रिजेश जी , आदरणीय विजय सर आप सबकी प्रतिक्रिया से उत्साहित…"
1 hour ago
Dr Ashutosh Mishra commented on Dr Ashutosh Mishra's blog post सौदागर
"आदरणीय शेख शहजाद उस्मानी जी आपके मशविरे मेरे लिए बेशकीमती होते हैं लघु कथा बिधा पर लिखने का प्रयास…"
1 hour ago
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post परवाह- लघुकथा
"बहुत बहुत आभार आ तेज वीर सिंह जी"
1 hour ago
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post परवाह- लघुकथा
"बहुत बहुत आभार आ सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप जी"
1 hour ago
डॉ छोटेलाल सिंह posted a blog post

जनहित में

जनहित मेंअप शब्दों से बचना सीखेंसबके दिल में बसना सीखेंगम की सारी खायी पाटेंहिल मिलकर के हँसना…See More
2 hours ago
डॉ छोटेलाल सिंह commented on Sushil Sarna's blog post कुछ क्षणिकाएं :
"आदरणीय सुशील सरना जी जीवंत क्षणिकाएं पढ़कर बहुत आनन्द की अनुभूति हुई दिली मुबारकबाद"
3 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service