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नए चेहरों की कुछ दरकार है क्या

1222 1222 122

नए चेहरों की कुछ दरकार है क्या ।
बदलनी अब तुम्हें सरकार है क्या ।।

बड़ी मुश्किल से रोजी मिल सकी है ।
किया तुमने कोई उपकार है क्या ।।

सुना मासूम की सांसें बिकी हैं ।
तुम्हारा यह नया व्यापार है क्या ।।

इलेक्शन लड़ गए तुम जात कहकर ।
तुम्हारी बात का आधार है क्या ।।

यहां पर जिस्म फिर नोचा गया है ।
यहां भी भेड़िया खूंखार है क्या ।।

बड़ी शिद्दत से मुझको पढ़ रहे हो ।
मेरा चेहरा कोई अखबार है क्या ।।

हिजाबों में खरीदारों की रौनक ।
गली में खुल गया बाज़ार है क्या ।।

बहुत दिन से कसीदे लिख रहे हैं ।
कलम में आपके भी धार है क्या ।।

कदम उसके जमीं पर अब नहीं हैं ।
हुआ कुछ चांद का दीदार है क्या ।।

तबस्सुम पर तेरे हैरत हुई है।
गमों की हो गयी भरमार है क्या ।।

महज मजहब मेरा पूछा था उसने ।
कहा तू देश का गद्दार है क्या ।।

नवीन मणि त्रिपाठी
मौलिक अप्रकाशित

Views: 765

Comment

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Comment by नाथ सोनांचली on August 21, 2017 at 5:14am
आद0 नवीन मणि जी उम्दा ग़ज़ल पर दाद हाजिर है,बधाई
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 20, 2017 at 8:49pm
आ. भाई नवीन जी बहुत ही धारदार गजलहुई है । हार्दिक बधाई ।

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