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आज की बेटी (क्षणिकाएं या अतुकान्त) / शेख़ शहज़ाद उस्मानी

पापा की बेटी
या
बाबा की बेटी।

देश की बेटी
या
वेश में बेटी।

स्वतंत्र बेटी
या
क़ैद में बेटी।

हेर-फेर में बेटी
या
डेरे-फेरे में बेटी।

हाथ बंटाती बेटी
या
'हाथ की सफाई' में बेटी।

गौरवशाली बेटी
या
कलंककारी बेटी।

उठती, उड़ती बेटी
या
उठाती, उड़ाती बेटी।

चौंकती बेटी
या
चौंकाती बेटी।

जीतती, जीती बेटी
या
हारती, मरती बेटी।

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 588

Comment

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Comment by Sheikh Shahzad Usmani on September 24, 2017 at 11:09am
रचना पर समय देकर हौसला अफज़ाई के लिए सादर हार्दिक आभार आदरणीय बृजेश कुमार 'ब्रज' जी और आदरणीय सलीम रज़ा रेवा साहब।
Comment by Sheikh Shahzad Usmani on September 24, 2017 at 11:06am
रचना पर समय देकर हौसला अफज़ाई और मार्गदर्शन के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया मुहतरम जनाब समर कबीर साहब।
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on September 10, 2017 at 11:28am
कुछ भी कहिये लेकिन बेटियों को समर्पित आपकी रचना सुन्दर और सार्थक है आदरणीय...सादर
Comment by SALIM RAZA REWA on September 9, 2017 at 8:42am
जनाब उस्मानी साहब बेटी को केंद्रित करती हुई खूबसूरत रचना मुबारक़बाद.
Comment by Samar kabeer on September 7, 2017 at 10:59pm
जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,बेटी को केंद्र बिंदु बनाकर अच्छी रचना लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।
ये क्षणिकाएं नहीं,इसका शीर्षक अतुकान्त कविता ही उचित है ।

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