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ग़ज़ल (सबसे रहे ये ऊँची मन में हमारी हिन्दी)

भाषा बड़ी है प्यारी जग में अनोखी हिन्दी,
चन्दा के जैसे सोहे नभ में निराली हिन्दी।

पहचान हमको देती सबसे अलग ये जग में,
मीठी जगत में सबसे रस की पिटारी हिन्दी।

हर श्वास में ये बसती हर आह से ये निकले,
बन के लहू ये बहती रग में ये प्यारी हिन्दी।

इस देश में है भाषा मजहब अनेकों प्रचलित,
धुन एकता की डाले सब में सुहानी हिन्दी।

शोभा हमारी इससे करते 'नमन' हम इसको,
सबसे रहे ये ऊँची मन में हमारी हिन्दी।


आज हिन्दी दिवस पर
22 122 22 // 22 122 22 बहर में

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on September 16, 2017 at 7:33pm
हिंदी की महिमा को प्रसारित करती सुन्दर रचना के लिए बधाइयाँ..सादर

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 16, 2017 at 6:00pm

आदरनीय वासुदेव भाई , हिन्दी की महिमा गान गज़ल के रूप मे अच्छी लगा , आपको हार्दिक बधाइयाँ ।

Comment by Samar kabeer on September 15, 2017 at 6:23pm
मैं अभी ओबीओ पर चल रहे 'चित्र से काव्य तक'आयोजन में व्यस्त हूँ,आयोजन के बाद चर्चा करते हैं ।
Comment by Niraj Kumar on September 15, 2017 at 5:50pm

आदरणीय बासुदेव जी,

मैंने अपनी जानकारी के लिए पूछा था शायद जनाब समर कबीर साहब कुछ प्रकाश डाल सकें.

सादर 

Comment by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' on September 15, 2017 at 4:58pm
आ0 नीरज कुमार जी इस बहर में मैंने कुछ रचनाएँ देखी थी। लय अच्छी लगी तो हिन्दी की महिमा में यह एक रचना अगले साल लिखी थी जब मुझे बहर आदि के विषय में नहीं के बराबर जानकारी थी।
यह शायद स्टेंडर्ड बहरों में से नहीं है।
Comment by Niraj Kumar on September 15, 2017 at 4:51pm

आदरणीय बासुदेव जी,

अरकान तो मैंने देख लिए थे मेरा मतलब इस बह्र के नाम से था. अरकान देखने से यह मुतकारिब मुसद्दस मुजायफ़ की कोई महजूफ बह्र लगती है लेकिन मुतकारिब मुसद्दस की कोई महजूफ बह्र मेरी जानकारी में ऐसी नहीं है जिसके अरकानों का क्रम ऐसा हो. 

सादर 

Comment by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' on September 15, 2017 at 10:57am
आ0 नीरज कुमारजी आपका बहुत धन्यवाद।
ग़ज़ल की बहर
22 122 22 // 22 122 22 बहर में
Comment by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' on September 15, 2017 at 10:56am
आ0 समर कबीर जी आपका हृदय से आभार। मुझे लय और मात्राओं में कहीं नुस्ख नज़र नहीं आया यदि कहीं आप बताते तो बात समझ में आती।
Comment by अलका 'कृष्णांशी' on September 14, 2017 at 9:02pm

सुन्दर अभिव्यक्ति , बधाई आदरणीय

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on September 14, 2017 at 7:34pm
हार्दिक बधाई

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"आ. भाई अमित जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए धन्यवाद।"
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