For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

दिल का ये मसअला है कोई दिल लगी नहीं - सलीम रज़ा रीवा : ग़ज़ल

221 2121 1221 212

..

दिल का ये मसअला है कोई दिल लगी नहीं,

मुमकिन तेरे बग़ैर मेरी ज़िन्दगी नही

..

ये और बात है कि वो मिलते  नहीं मगर,

किसने कहा कि उनसे मेरी दोस्ती नहीं

..

तेरे ही दम से खुशियां है घर बार में मेरे,

होता  जो तू नहीं तो ये होती ख़ुशी नहीं

..

वो क्या गया की रौनके महफ़िल चली गयी,

जल तो रही है शम्अ मगर रोशनी नहीं

..

ख़ून-ए-जिगर से मैंने सवाँरी है हर ग़ज़ल,

मेरे, सुख़न  का  रंग कोई  काग़ज़ी नहीं

..

मैं  खुद  गुनाहगार  हूँ अपनी  निगाह  में,

उसके ख़ुलूस-ओ-प्यार में कोई कमी नहीं

..

तुझसे रज़ा के शेरों में संदल सी है महक,

मुमकिन तेरे बग़ैर मेरी शायरी नहीं

...

मौलिक व अप्रकाशित

Gazal by salimrazarewa

Views: 252

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by SALIM RAZA REWA on October 18, 2017 at 12:01pm
जनाब नीलेश नूर जी
आपकी मुहब्बत सलामत रहे..
Comment by Nilesh Shevgaonkar on October 18, 2017 at 11:30am

अच्छी ग़ज़ल के लिए बधाई आ. सलीम साहब 

Comment by SALIM RAZA REWA on October 18, 2017 at 8:56am
आ. अजय तिवारी जी,
आपकी नज़रे इनायत के लिए शुक्रिया.
Comment by Ajay Tiwari on October 18, 2017 at 6:38am

आदरणीय सलीम साहब,

खूबसूरत ग़ज़ल हुई है. शुभकामनाएं.

सादर 

Comment by SALIM RAZA REWA on October 17, 2017 at 10:28pm
जनाब तस्दीक़ साहब،
आपकी महब्बत के लिए शुक्रिया. आपका मशविरे का तहे दिल से शुक्रिया... यूँ ही करम फरमाते रहे...
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on October 17, 2017 at 10:09pm
जनाब सलीम साहिब ,अच्छी ग़ज़ल हुई है ,मुबाकबाद क़ुबूल फरमाएं । आपके मतले का उला मिसरा मुकेश के एक गाने का मिसरा है जिसे बदल दीजिए ,शेर2 के सानी मिसरे में एब-तनाफुर (उस से ) है,इसे यूँ करलें (ये और बात है कि वो मिलते नहीं मगर--किसने कहा कि उनसे मेरी दोस्ती नहीं )
Comment by SALIM RAZA REWA on October 16, 2017 at 9:45pm
आली जनाब समर साहब आपकी नज़रे इनायत के लिए शुक्रिया. तब्दीली की जा रही है..
Comment by Samar kabeer on October 16, 2017 at 9:09pm
जनाब सलीम रज़ा साहिब आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।
मतले के दोनों मिसरों में रब्त नहीं है ।
'इससे जहाँ में कोई भी शय क़ीमती नहीं'
'क़ीमती शय'से मुराद यहाँ 'दिल का मुआमला'है तो मशकूक है ।
दूसरे शैर के सानी मिसरे में 'उनसे'की जगह "उससे"कर लें,शुतरगुर्बा का दोष है ।
पांचवें शैर में 'ख़ूनें' को "ख़ून-ए-"कर लें ।
मक़्ते के ऊला मिसरे में 'तुमसे'की जगह "तुझसे"कर लें,शुतरगुर्बा का दोष है ।
ख़ुश रहो भाई ।
Comment by SALIM RAZA REWA on October 16, 2017 at 7:01pm
जनाब अफरोज साहब,
आपकी महब्बत के लिए दिली शुक्रिया..
Comment by SALIM RAZA REWA on October 16, 2017 at 7:00pm
मुहतरमा बन्दना जी,
आपकी नज़रे इनायत के लिए शुक्रिया, आपकी महब्बत सलामत रहे.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Mahendra Kumar commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : कैसे बनता है कोई शख़्स तमाशा देखो
"हृदय से आभारी हूँ आदरणीय तेज वीर सिंह जी. बहुत-बहुत शुक्रिया. सादर."
26 minutes ago
Mahendra Kumar commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : अशआर मेरे जिनको सुनाने के लिए हैं
"लिखना सार्थक रहा आदरणीय अजय जी. बहुत-बहुत शुक्रिया. हार्दिक आभार. सादर."
27 minutes ago
Mahendra Kumar commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : अशआर मेरे जिनको सुनाने के लिए हैं
"बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय तेज वीर सिंह जी. हृदय से आभारी हूँ. सादर."
27 minutes ago
Mahendra Kumar commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : अशआर मेरे जिनको सुनाने के लिए हैं
"सादर आदाब आदरणीय समर कबीर सर. इस प्रयास की सराहना के लिए हृदय से आभारी हूँ. यदि आप यह भी इंगित कर…"
28 minutes ago
Mahendra Kumar commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (दिल ने जिसे बना लिया गुलफाम दोस्तो)
"लाए हैं अंजुमन में किसी अजनबी को वहदिल में न यूँ उठा मेरे कुहराम दोस्तो l ...वाह!  बहुत…"
35 minutes ago
Mahendra Kumar commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"बढ़िया ग़ज़ल हुई है आदरणीय नवीन जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए.  1. //दिया था जो वसीयत में…"
44 minutes ago
Mahendra Kumar commented on Samar kabeer's blog post 'वतन को आग लगाने की चाल किसकी है'
"खड़े हुए हैं सर-ए-राह आइना लेकर हमारे सामने आए मजाल किसकी है ....वाह! ग़ज़ब का शेर! इस शानदार ग़ज़ल के…"
1 hour ago
Mahendra Kumar commented on Maheshwari Kaneri's blog post मातृ भूमि के लिए ..
"बढ़िया लगी आपकी रचना आदरणीया माहेश्वरी कनेरी जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए.  कुछ टंकण…"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Usha Awasthi's blog post जाने कितने बढ़े हुए हैं
"आ. ऊषा जी, अच्छी रचना हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ९१
"आ. भाई राजनवादवी जी, अच्छी गजल हुयी है। हार्दिक बधाई ।"
1 hour ago
Mahendra Kumar commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post जागो उठो हे लाल तुम (मधुमालती छंद)
"बहुत ख़ूब रचना हुई है आदरणीय सुरेन्द्र जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल-बलराम धाकड़ (किसने सूरज यहाँ खंगाले हैं)
"आ. भाई बलराम जी, सुंदर गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।  पहले मिसरे में एक वचन सूरज के लिए…"
1 hour ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service