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भोला ने हाँफते-हाँफते घर में प्रवेश किया और माँ से बोला -" जल्दी से दे......जल्दी से दे....देर न कर...बाहर लूट मची है....लूट मची है... मुझे भी लूटकर लाना है.....।"
" मगर क्या दे दूँ..... किस चीज की लूट मची है....मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा बेटा....?"
" दो-चार खाली डिब्बे और कुछ प्लास्टिक की बोतलें दे दे ।'
" लेकिन क्यों ?"
" तू नहीं समझेगी माँ । कल रात अयोध्या में नई सरकार ने लाखों की संख्या में दीए जलाए थे । दीयों में बचा तेल हमारे जैसे कई गरीब के बच्चे लूट के ले जा रहे हैं । मैं भी लाऊँगा ताकि तू चार-पाँच दिन उससे सब्जी बना सके ।"
मौलिक एवं अप्रकाशित ।

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Comment by Mohammed Arif on October 23, 2017 at 3:33pm
बहुत-बहुत आभार आदरणीया नीता कसार जी ।
Comment by Mohammed Arif on October 23, 2017 at 3:32pm
अपनी अमूल्य टिप्पणी से पोषित करने का बहुत-बहुत आभार आदरणीय सुरेंद्रनाथ जी ।
Comment by Mohammed Arif on October 23, 2017 at 3:30pm
अपनी अमूल्य टिप्पणी से पोषत करने का बहुत-बहुत आभार आदरणीय विजय शंकर जी ।
Comment by Mohammed Arif on October 23, 2017 at 3:28pm
लघुकथा पर अपनी टिप्पणी से पोषित करने पर आपका बहुत-बहुत आभार आदरणीय जवाहर लाल सिंह जी ।
Comment by Mohammed Arif on October 23, 2017 at 3:25pm
आपकी उत्साहजनक टिप्पणी से अभिभूत हूँ आदरणीय आशुतोष जी । बहुत-बहुत आभार ।
Comment by Mohammed Arif on October 23, 2017 at 3:24pm
बहुत-बहुत आभार आदरणीया कल्पना भट्ट जी । लेखन सार्थक हो गया ।
Comment by Nita Kasar on October 23, 2017 at 2:22pm
शीर्षक को सार्थक करती उम्दा कथा के लिये बधाई आ० मोहम्मद आरिफ़ जी ।
Comment by नाथ सोनांचली on October 23, 2017 at 1:13pm
आद0 आरिफ भाई जी सादर अभिवादन। इतनी सूक्ष्म दृष्टि से आपने इस पहलू को छुआ, यकीनन बेहद उम्दा। एकतरफ करोड़ो रूपये दिखावे के नाम पर दूसरी तरफ गरीब दिए के तेल से जीवन यापन करने को मजबूर। कोटिश बधाइयाँ आपको इस सृजन पर। सादर
Comment by Dr. Vijai Shanker on October 23, 2017 at 5:22am
कथा का शीर्षक " लूट " और कथा के वर्णन में छिपी विवशता ही कथा के सार हैं। आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी , प्रस्तुति पर बधाई , सादर।
Comment by JAWAHAR LAL SINGH on October 22, 2017 at 9:21pm

मुझे ऐसा लगता है कि अंधभक्त छोड़ शायद ही कोई इस आयोजन से सा खुश होगा पर खुश दिखने का भी हुनर होता है. गरीब बच्चों और गरीब महिलाओं के फोटो आये थे दूसरे दिन जो तंगहाली के ब्यथा कह रही थी. 

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