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मधुर दोहे :

मन के मधुबन में मिले, मन भ्र्मर कई बार।
मूक नयन रचते रहे, स्पंदन का संसार।।

थोड़ा सा इंकार था थोड़ा सा इकरार।
सघन तिमिर में हो गयी , प्रणय सुधा साकार।।

बाहुपाश से देह के, टूटे सब अनुबंध।
स्वप्न सेज महका गयी ,मधुर बंध की गंध।।


सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Sushil Sarna on November 20, 2017 at 8:18pm

आदरणीय रामानुज जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार। भविष्य में ५ से कम तो कभी नहीं होंगे आपके प्रिय दोहे। थैंक्स 

Comment by Sushil Sarna on November 20, 2017 at 8:17pm

आदरणीय  Tasdiq Ahmed Khan साहिब, आदाब , सृजन को अपनी मनोहारी प्रतिक्रिया से मान देने का दिल से आभार।

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on November 20, 2017 at 3:24pm

सुंदर दोहे | अगली बार आपके कम से कम पाँच दोहें पढने को मिलने चाहिए भाई शुशील सरना जी 

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on November 20, 2017 at 8:29am
जनाब सुशील सरना साहिब ,सुन्दर और मधुर दोहे हुए हैं ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं
Comment by Sushil Sarna on November 19, 2017 at 6:18pm

आदरणीया डॉ प्राची सिंह जी सृजन को मान देने एवं सुझाव देने का दिल से आभार।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on November 19, 2017 at 1:25pm

बहुत सुन्दर 

//मन भ्रमर कई बार //.... इसमें प्रवाह बाधित है, शब्द संयोजन को बदल कर देखें 

सादर 

Comment by Sushil Sarna on November 16, 2017 at 6:03pm

आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब मधुर दोहों पर आपकी मधुर प्रतिक्रिया ने उनकी मधुरता में चार चाँद लगा दिए  ... तहे दिल से शुक्रिया।  विशवास रखिये अब जब भी हम आएंगे  ५ दोहों से कम तो कभी न आएंगे।  सादर। ... 

Comment by Samar kabeer on November 16, 2017 at 5:25pm
जनाब सुशील सरना जी आदाब,बहुत सुंदर दोहे रचे आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।
एक प्रस्तुति में कम से कम पांच दोहे तो होना चाहिए ।
Comment by Sushil Sarna on November 16, 2017 at 11:55am

आदरणीय मो. आरिफ साहिब, आदाब , सृजन को अपनी मनोहारी प्रतिक्रिया से मान देने का दिल से आभार।

Comment by Sushil Sarna on November 16, 2017 at 11:55am

आदरणीय सलीम साहिब आदाब , प्रस्तुति के भावों को अपनी मधुर प्रशंसा से अलंकृत करने का दिल से आभार।

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