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ग़ज़ल (किसी खंजर का मत अहसान लीजिए )

(मफाईलुन-मफाईलुन -फऊलन )

किसी खंजर का मत अहसान लीजिए |
हमारी मुस्करा कर जान लीजिए |

जिसे अपना बनाने जा रहे हैं
उसे अच्छी तरह पहचान लीजिए |

हमारा साथ दोगे ज़िंदगी भर
वफ़ा से पहले दिल में ठान लीजिए |

मुझे तो बाद में चुन लीजिएगा
जहाँ की खाक पहले छान लीजिए |

किसे है ख़ौफ़ दिलबर इम्तहाँ का
कमाँ हाथों में अपने तान लीजिए |

किसी का लीजिए अहसान लेकिन
न दौलत मंद का अहसान लीजिए |

मुहब्बत की कहाँ होती है मंज़िल
ये सच तस्दीक़ पहले जान लीजिए |

(मौलिक व अप्रकाशित )

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Comment by Tasdiq Ahmed Khan on December 9, 2017 at 4:28pm

जनाब राम अवध साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया

Comment by Ram Awadh VIshwakarma on December 9, 2017 at 3:08pm

आदरणीय तस्दीक़ अहमद साहब खूबसूरत ग़ज़ल के लिये बहुत बहुत बधाई।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on December 8, 2017 at 6:18pm

जनाब गुर प्रीत साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया

Comment by Gurpreet Singh jammu on December 8, 2017 at 3:29pm

आदरणीय तस्दीक अहमद खान जी ,,,बहुत खूबसूरत ग़ज़ल ,,मतला विशेष तौर पर पसंद आया ,, मुबारकबाद कुबूल करें जी

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on December 8, 2017 at 11:31am

जनाब सलीम रज़ा साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on December 8, 2017 at 11:30am

मुहतर्मा रक्षिता साहिबा ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया 

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on December 8, 2017 at 11:29am

मुहतरम जनाब  समर साहिब , लीजे  लफ्ज़ उर्दू  डिक्शनरी में है ही नहीं ,सिर्फ बोल चाल में है जो कि "लीजिये " में हर्फ़ को गिरा कर  मिलता है ।

वज़्न इसका लीजे ही लिया गया है ।मेरे हिसाब से लिखने में तो सही लफ्ज़ ही लिखना चाहिए जो मैं ने किया है --सादर

Comment by SALIM RAZA REWA on December 8, 2017 at 7:52am
वाह... जनाब तसदीक़ साहिब क्या खूब ग़ज़ल कही है, हर शेर के लिए मुबारक़बाद,
Comment by रक्षिता सिंह on December 8, 2017 at 1:22am

 आदरणीय, तस्दीक़ जी

खूबसूरत गज़ल के लिए बहुत बहुत मुबारकबाद।

Comment by Samar kabeer on December 7, 2017 at 10:29pm

ये कैसे मुमकिन है कि आप 'लीजिए' लिखें और पाठक उसे "लीजे" पढ़े, दोनों लफ़्ज़ अपनी अपनी जगह सही हैं ?

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