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इश्क़ करने की चलो आज सजा हो जाए (ग़ज़ल 'राज')

2122  1122  1122  22

इससे पहले कि नई और ख़ता हो जाए 
इश्क़ करने की चलो आज सजा हो जाए 


बेवफाई का तो दस्तूर निभाया तुमने  
अब कोई रस्म जुदाई की अदा हो जाए 

 

लो झुका दी है जबीं आप निकालो अरमां  
आज पूरी ये चलो दिल की रज़ा हो जाए

 

कू ब कू हो कोई चर्चा यहाँ अपना वल्लाह

शह्र में फिर कोई बदनाम वफ़ा हो जाए

 

जाते जाते मेरे दीयों को बुझाते  जाना

साथ जिनके मेरा हर ख़्वाब फ़ना हो जाए 

 ---मौलिक एवं अप्रकाशित 

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Comment by rajesh kumari on December 15, 2017 at 10:50am

आद०रामबली जी ,आपको ग़ज़ल पसंद ई बहुत बहुत शुक्रिया .

Comment by रामबली गुप्ता on December 14, 2017 at 3:33am

आद0 बहन राजेश कुमारी जी बहुत ही सुंदर ग़ज़ल कही आपने हार्दिक बधाई स्वीकार करें।सादर


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 13, 2017 at 11:37am

आद० सुरेन्द्र नाथ भैया ,आपको ग़ज़ल पसंद आई मेरा लिखना सार्थक हुआ दिल से बहुत- बहुत शुक्रिया .


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 13, 2017 at 11:35am

आद० रोहित डोबरियाल जी ,ग़ज़ल पर शिरकत और सुखन नवाजी का  बहुत बहुत शुक्रिया ओबीओ में स्वागत है आपका .

Comment by नाथ सोनांचली on December 13, 2017 at 4:46am
आद0 बहन राजेश कुमारी जी सादर अभिवादन। बेहतरीन ग़ज़ल कही आपने, पढ़कर अच्छा लगा। शैर दर शैर मुबारकबाद कुबूल फरमायें।
Comment by रोहित डोबरियाल "मल्हार" on December 12, 2017 at 10:26pm

वाह क्या खूब लिखा है......

बेवफाई का तो दस्तूर निभाया तुमने  

अब कोई रस्म जुदाई की अदा हो जाए 

absaaron ka tara


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Comment by rajesh kumari on December 12, 2017 at 7:25pm

आद० तेजवीर सिंह जी ,आपको ग़ज़ल पसंद आई दिल से बहुत बहुत शुक्रिया आपका सादर 

Comment by TEJ VEER SINGH on December 12, 2017 at 7:09pm

हार्दिक बधाई आदरणीय राजेश कुमारी जी। बेहतरीन गज़ल।

जाते जाते मेरे दीयों को बुझाते  जाना

साथ जिनके मेरा हर ख़्वाब फ़ना हो जाए 


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Comment by rajesh kumari on December 12, 2017 at 6:45pm

मोहतरम जनाब तस्दीक साहब ग़ज़ल पर दाद और इस्स्लाह दोनों का स्वागत है बहुत बहुत शुक्रिया .


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Comment by rajesh kumari on December 12, 2017 at 6:43pm

आद० अफरोज़ साहब .आपको ग़ज़ल पसंद आई आपका दिल से शुक्रिया .

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