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हमने जितने कंटक बोये, इस जीवन में चुनने हैं (गीत 'राज')

गीत

धरती अम्बर पर्वत नदियाँ,सबके ताने सुनने हैं

हमने जितने कंटक बोये, इस जीवन में चुनने हैं

सर्दी गर्मी की मार सही

या बिन मौसम बरसात सही

चंदा तारों से जगमग हों

या काली नीरव रात सही 

हमको तो अभिलाषाओं के,ताने बाने बुनने हैं

हमने जितने कंटक बोये,इस जीवन में चुनने हैं

इक मजहब की दीवार मिले  

या वर्ण वर्ग की रार मिले  

तेरे मेरे  की खाई हो

या द्वेष जलन का हार मिले

हमको तो रिश्तों के मानक ,खामोशी से गुनने हैं

हमने जितने कंटक बोये,इस जीवन में चुनने हैं

पाप औ पुण्य के तीर चलें    

या आतंकी शमशीर चलें 

झूठे वादे झूठे नेता

या पोंगा पंडित पीर चलें

हमको तो सच की थापी से,छल के गठ्ठर धुनने हैं

हमने जितने कंटक बोये,इस जीवन में चुनने हैं

 हम मंजिल से अनजान सही

 मुश्किल में अपनी जान सही

ऊँची उफनाती  लहरे हों

भीतर भीतर तूफ़ान सही

हमको तो सागर के उर से ,सच्चे मोती चुनने हैं

हमको तो अभिलाषाओं के,ताने बाने बुनने हैं

--------मौलिक एवं अप्रकाशित 

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 7, 2017 at 10:41am

मोहतरम जनाब तस्दीक जी ,आपका तहे  दिल से शुक्रिया .


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 7, 2017 at 10:40am

आद० अजय तिवारी जी ,आपका  बहुत बहुत आभार .


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 7, 2017 at 10:39am

आद० सुरेन्द्रनाथ भैया ,आपको गीत पसंद आया बहुत बहुत शुक्रिया मेरा लिखना सार्थक हुआ 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 7, 2017 at 10:19am

आद० समर भाई जी आदाब ,गीत पर आपकी दाद मिली तथा कुछ सुझाव भी जिनका दिल से स्वागत है मूल पोस्ट में सुधार कर चुकी हूँ 

आपका बहुत बहुत शुक्रिया .सदैव आपका इसी तरह मार्ग दर्शन मिलता रहे .


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 6, 2017 at 9:00pm

आद० उस्मानी जी ,आपको गीत पसंद आया मेरा लिखना सार्थक हुआ दिल से बहुत बहुत आभारी हूँ 

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on December 5, 2017 at 7:39pm

मुहतर्मा राजेश कुमारी साहिबा , सुन्दर गीत हुआ है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं

Comment by Ajay Tiwari on December 4, 2017 at 3:59pm

आदरणीया राजेश कुमारी जी,

इस खूबसूरत गीत-प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाईयाँ.

सादर 

Comment by नाथ सोनांचली on December 3, 2017 at 3:41pm
आद0 बहन राजेश कुमारी जी सादर अभिवादन, बहुत उम्दा और बेहतरीन गीत लिखा है आपने,इस प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार कीजिये।आद0 समर साहब की बातों से सहमत हूँ। सादर
Comment by Samar kabeer on December 3, 2017 at 12:37pm
बहना राजेश कुमारी जी आदाब,बहुत उम्दा और सार्थक गीत लिखा है आपने,इस प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार करें ।
कुछ बातें आपके संज्ञान में लाना चाहूँगा :-

'या तारों की बारात सही'
इस पंक्ति से ये ज़ाहिर होता है कि 'तारों की बारात'कोई कष्ट दायक चीज़ है,'सही'शब्द तो इसी के लिए प्रयोग होता है न?

'या आतंकी शमशीर चलें'
इस पंक्ति में 'शमशीर'एक वचन है और 'चलें'शब्द बहुवचन के लिए प्रयोग होता है,देखियेगा ।
कुछ शब्दों में अनुस्वार लगने थे जो नहीं लगे,देखियेगा ।
Comment by Mohammed Arif on December 3, 2017 at 7:36am
आदरणीया राजेश कुमारी जी आदाब,
बहुत ही सुंदर गीत की पेशकश । हृदय को छू गया । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

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