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बापू की जय(लघु कथा)

-काम हो जायेगा?
-पक्का।
-कोई चूक न हो।
-नहीं होगी भइये।
-पिछली बार हो गयी थी।
-अबकी बार गलती की गुंजाइश नहीं है।
-नजराना भी तो एक कोटि हो गया।
-उफ्फ, महंगाई !क्या करें?मुँह मत खोलना।
-ठीक,पर मेरा लल्ला डी एम हो तो जाये।
-हो जायेगा।बापू की मूर्त्ति के नीचे खड़ा हूँ।झूठ नहीं बोलूँगा।
-राम-राम भाई!
'बापू की जय', बोल दोनों चलते बने।
" मौलिक व अप्रकाशित"

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Comment by Ajay Tiwari on December 12, 2017 at 1:15pm

आदरणीय मनन जी,

इस बेहतरीन कथा-प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाईयाँ.

सादर   

Comment by Manan Kumar singh on December 11, 2017 at 8:00pm

आभारी हूँ आदरणीय नादिर भाई।

Comment by Manan Kumar singh on December 11, 2017 at 7:59pm

बेहद उत्साहपरक टिप्पणी के लिए आपका बहुत बहुत आभार आदरणीय उस्मानी जी,आदाब।

Comment by Manan Kumar singh on December 11, 2017 at 7:57pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय समर जी, नमन।

Comment by नादिर ख़ान on December 11, 2017 at 5:28pm

सुन्दर प्रस्तुति आदरणीय मनन कुमार जी बधाई स्वीकारें | 

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on December 11, 2017 at 3:59pm

 हो गया काम !!!

बेहतरीन कटाक्षपूर्ण लघुकथा ने कर दिया अपना पूरा काम !!! क्या ख़ूब वातावरण/परिवेश बनाया है भ्रष्टाचार पर तीखे कटाक्ष के लिए !!! तथ्यों पर बेहतरीन कुशन !! तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब मनन कुमार सिंह   Manan Kumar singhसाहिब।

Comment by Samar kabeer on December 11, 2017 at 2:26pm

जनाब मनन कुमार सिंह जी आदाब,कम शब्दों में बहुत उम्दा लघुकथा लिखी आपने,बहतरीन तंज़,इस प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Manan Kumar singh on December 11, 2017 at 9:17am

आपका आभार आदरणीय आरिफ भाई!लघु कथा है,कविता नहीं।

Comment by Mohammed Arif on December 11, 2017 at 8:10am

आदरणीय मनन कुमार जी आदाब,

                           रिश्वत-भ्रष्टाचार को रेखांकित करती बेहतरीन कविता । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

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