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कुंडलियाँ-रामबली गुप्ता

जीवन में निज यत्न से, करिये ऐसे काम।
आप रहें या ना रहें, रहे सदा पर नाम।
रहे सदा पर नाम, नया इतिहास बनाएँ।
बनें जगत प्रतिमान, लोग यश गाथा गाएँ।
अगर समर्पण-स्नेह-धैर्य-साहस रख मन में।
हों इस हेतु प्रयास, सफल होंगे जीवन में।।1।।

जग में कठिन न है सखे, करना कोई काम।
दृढ निश्चय कर के बढ़ो, होगा जग में नाम।।
होगा जग में नाम, लक्ष्य पाना जो ठानो।
हर बाधा स्वयमेव, मिटेगी सच यह मानो।।
गिरि-सरि आयें राह , चुभें या काँटें पग में।
लक्ष्य प्राप्त कर मान, बढ़ाओ अपना जग में।।2।।

रचना-रामबली गुप्ता

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Sushil Sarna on December 17, 2017 at 6:44pm
Waaaaaaaah shaaaaàndar sir
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on December 16, 2017 at 8:51pm

उत्तम कुण्डलिया आदरणीय..

Comment by Kalipad Prasad Mandal on December 16, 2017 at 11:25am

बहुत सुन्दर कुण्डलिया , बधाई आ रामबली जी 

Comment by Manoj kumar shrivastava on December 14, 2017 at 8:43pm

आदरणीय रामबली गुप्ता जी, सादर नमस्कार, इस सुंदर रचना हेतु आपको कोटिशः बधाइयाॅ।

Comment by Samar kabeer on December 14, 2017 at 5:30pm

जनाब रामबली गुप्ता जी आदाब,सुंदर कुण्डलिया छन्द के लिए बधाई स्वीकार करें ।

Comment by vijay nikore on December 14, 2017 at 4:25pm

 सुंदर कुण्डलियाँ, हार्दिक बधाई, आ० रामबली जी।

Comment by नाथ सोनांचली on December 14, 2017 at 8:41am

आद0 रामबली जी सादर अभिवादन।बेहतरीन कुण्डलिया लिखीं आपने,बहुत बहुत बधाई प्रेषित है। सादर

Comment by रामबली गुप्ता on December 14, 2017 at 3:07am

धन्यवाद राणा जी

Comment by रामबली गुप्ता on December 14, 2017 at 3:07am

हृदय से आभार पवन जी

Comment by रामबली गुप्ता on December 14, 2017 at 3:06am

आद0 आरिफ़ जी सादर धन्यवाद

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