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पर्यावरणीय कविता --"हिंसक"


हमने एक दुनिया उजाड़ दी
शेरों और नील गायों की
ख़रीद ली उनकी खाल
बारह सींगों के
सींगों से कर रहे हैं
घर की दीवारों का श्रृंगार
अब आदमखोर
शेरों को नहीं
इंसानों को कहना होगा बेहतर
हिंसक हरकतें सारी
चुरा ली है
शेरों से इंसानों ने
कितने ही लक्षण आ गए हैं
पशुओं वाले इंसानों में
ऐसे में लाजमी है
जंगलों का ख़त्म होना
शेरों का ख़त्म होना ।

मौलिक एवं अप्रकाशित ।

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Comment

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Comment by Mohammed Arif on December 21, 2017 at 8:07am

बहुत-बहुत आभार आदरणीय लक्ष्मण धामी जी ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 20, 2017 at 8:02pm

कोटि कोटि बधाई ।

Comment by Mohammed Arif on December 20, 2017 at 7:52am

रचना पर संक्षिप्त प्रतिक्रिया से सुशोभित करने का बहुत-बहुत आभार आदरणीय सतविंद्र कुमार जी ।

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on December 19, 2017 at 10:14pm

उत्त्माभिव्यक्ति आदरणीय मोहह्म्म्द आरिफ साहब

Comment by Mohammed Arif on December 19, 2017 at 7:59am

बहुत-बहुत आभार आदरणीय महेंद्र कुमार जी ।

Comment by Mahendra Kumar on December 18, 2017 at 10:20pm

इस बढ़िया कविता हेतु हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए आ. मोहम्मद आरिफ़ जी. सादर.

Comment by Mohammed Arif on December 18, 2017 at 7:39pm

कविता पर विचारात्मक और सुधारात्मक टिप्पणी देने का बहुत-बहुत आभार आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब । आपकी इस्लाह सर आँखों पर । मैं सुधार कर लूँगा ।

Comment by Mohammed Arif on December 18, 2017 at 7:37pm

रचना के अनुमोदन और हौसला अफजाई का बहुत-बहुत आभार आदरणीया नीलम उपाध्याय जी ।

Comment by Samar kabeer on December 18, 2017 at 5:08pm

जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहिब आदाब,अच्चबी और सच्ची कविता लिखी,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

'शेरों और नील गायों की

खरीद ली उनकी खाल'

इन पंक्तियों को यूँ लिखें:-

"शेरों और नील गायों की

ख़रीद ली हमने खाल"

'अब आदम ख़ोर

शेरों को नहीं

इंसानों को कहना होगा बहतर'

इसमें से 'बहतर' शब्द निकाल दें ।

Comment by Neelam Upadhyaya on December 18, 2017 at 12:36pm

आदरणीय मोहम्मद आरिफ़ जी, पर्यावरण असंतुलन के प्रति चिंता दर्शाती बहुत ही उम्दा रचना । बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

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