For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

इसके आगे बस खुदा का नाम है।

 
सर पे मेरे इश्क का इल्जाम है,
और दिल का टूट जाना आम है।

हुस्न दौलत इश्क सब बेदाम है,

इसके आगे बस खुदा का नाम है।

दफ़्अतन यूँ जा रहे हो छोड़कर,
क्या तुम्हें कोई जरूरी काम है ?

ठहरो भी बैठे रहो आगोश में,
पीने दो आँखों से, ये जो जाम है।

यूँ ना देखो बेरुखी से अब हमें,
दिल ये तेरे इश्क में बदनाम है।

चल दिए यूँ छोड़ कर दामन मेरा,
क्या यही मेरी वफ़ा का दाम है।

हम तो समझे थे जिसे सबसे जुदा
पर उसे भी काम से ही काम है।

कर चुके रुखसत तेरी यादों को हम
अब कहीं जाकरके कुछ आराम है।

सोजिशे दिल और इंसान गमजदः
इश्क का तो बस यही अंजाम है।।

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 533

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by नाथ सोनांचली on December 26, 2017 at 8:50am

इस ग़ज़ल को यहाँ दुबारा पोस्ट करने का औचित्य

Comment by Samar kabeer on December 24, 2017 at 5:03pm
  1. इस ग़ज़ल पर तरही मुशायरे में टिप्पणी दे चुका हूँ ।
Comment by Mohammed Arif on December 24, 2017 at 1:26pm

आदरणीया रक्षिता जी आदाब,

                        आपने यह ग़ज़ल तरही मुशायरा 90 की ग़ज़ल ब्लॉग पोस्ट पर डाल दी है । मंच का नियम है कि जो ग़ज़ल या अन्य रचनाएँ लाइव आयोजन में हो उसे अपने ब्लॉग पोस्ट पर नहीं डाल सकते । ब्लॉग पोस्ट से इसे हटाना होगा ।

Comment by Kalipad Prasad Mandal on December 24, 2017 at 11:56am

आ रक्षिता सिंह ,आपकी रूमानी ग़ज़ल दिल तक उतर गयी | हर शेर काबिले तारीफ है |दिली  मुबाराक्बाद स्वीकार करें |

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

sushil yadav posted blog posts
Monday
Sushil posted blog posts
Monday
vijay nikore posted a blog post

अनसुने अनकहे के बीच

                        अनसुने अनकहे के बीच.कहे अनसुने-से रहे कुछ जज़्बातउसपर अनकहे एहसासों का…See More
Monday
रोहित डोबरियाल "मल्हार" replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"1 लाख मासिक चाहिए ही क्यों भाई, वर्डप्रेस CRM में वेबसाइट को ट्रांसफर कर दिया जाए, तो सालाना खर्च…"
Oct 15
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service