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16,16 पर यति,चार पद, दो-दो पद समतुकांत

बढ़ती जाती है आबादी,रोजगार की मजबूरी है
पैसे की खातिर देख बढ़ी,किस-किस से किसकी दूरी है
उस बड़े शहर में जा बैठे, घर जहाँ बहुत ही छोटे हैं
विचार महीन उन लोगों के, जो दिखते तन के मोटे हैं

पहले गाँवों में बसते थे,घर आँगन मन था खुला-खुला
थोड़े में भी खुश रहते थे,हर इक विपदा को सभी भुला
कोई कठिनाई अड़ी नहीं,मिल उसका नाम मिटाते थे
जो रूखा-सूखा होता था,सब साथ बाँट कर खाते थे

तब धमा चौकड़ी होती थी,खेतों की टेढ़ी मेढ़ों पे
बचपन खिलकर पकता रहता,अमरूद, पपीते, बेरों पे
तब चने मटर की फलियां थी,गाजर,मूली शलगम होते
खेत भले थोड़ा था अपना,लेकिन दद्दू सब कुछ बोते

अब बचपन दबा किताबों से,डूबा रहता कुछ खेलों में
कम्प्यूटर,चालित फोन मिले, बहका बस इनके मेलों में
खेत सुरक्षित रहे नहीं हैं,बचपन की उनसे दूरी है
ज़हर छिड़कना है खेतो में,ऐसी भी तो मजबूरी है

सोच समझ कर अब चलना है,धरती को स्वर्ग बनाना है
जल-जीवन सबकुछ निर्मल हो,वातावरण वही लाना है
वन-उपवन से रहे महकती औ हवा जमीं की पावन हो
कुछ ऐसे कदम उठाए हम,जीवन सबका मन भावन हो

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on January 17, 2018 at 9:37pm

आदरणीय धामी सर बहुत बहुत आभार हौंसलाफ़ज़ाई के लिए

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on January 17, 2018 at 9:37pm

आदरणीय तस्दीक अहमद जी ,उत्साहवर्धन के लिए तहेदिल शुक्रिया

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 28, 2017 at 7:28pm

आ. भाई सतविंद्र जी, सुंदर रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on December 28, 2017 at 6:29pm

जनाब सतविंद्र कुमार साहिब ,सुन्दर सवैया छन्द हुए हैं ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं ।

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on December 28, 2017 at 3:22pm

आदरणीय महेंद्र कुमार जी हौंसलाफ़ज़ाई के लिए बहुत बहुत आभार आपका

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on December 28, 2017 at 3:21pm

आदरणीय समर कबीर जी,सादर हार्दिक आभार उत्साहवर्धन के लिए

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on December 28, 2017 at 3:20pm

आदरणीय सुरेन्द्र नाथ भाई जी,उत्साहवर्धन के लिए बहुत-बहुत आभार

Comment by Mahendra Kumar on December 27, 2017 at 10:29am

बढ़िया प्रस्तुति है आ. सतविन्द्र जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर.

Comment by Samar kabeer on December 26, 2017 at 2:05pm

जनाब सतविन्द्र कुमार जी आदाब,बढ़िया छन्द,बधाई स्वीकार करें ।

Comment by नाथ सोनांचली on December 26, 2017 at 12:15pm

आद0 सतविंदर भाई जी सादर अभिवादन। बेहतरीन मत्त सवैया पर बधाई स्वीकार करें। सादर

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