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(1) राष्ट्रीय पर्व पर
मिला किसी को
पद्म भूषण , पद्म विभूषण
तो किसी को मिला पद्म श्री
लेकिन जो थे सच्चे हक़दार
नहीं मिला उन्हें यह सम्मान
क्योंकि उनकी नहीं थी कोई
राजनैतिक पहचान । 

 
(2) जिन बच्चों को माँ-बाप ने
चलना -फिरना , उठना-बैठना
आदि का सलीका सिखाया
उन्हीं बच्चों ने बड़ा होकर
बुढ़ापे में वृद्धाश्रम पहुँचाया ।

 

(3) दुर्घटना और बीमारियाँ
बहुत सस्ती हो गईं हैं
इसीलिए तो-
बीमा किश्त महँगी हो गई है ।

 

 

मौलिक एवं अप्रकाशित ।

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Comment by Saurabh Pandey on January 18, 2018 at 2:04pm

आदरणीय आरिफ़ जी, आपकी क्षणिकाएँ सदा पठनीय हुआ करती हैं. 

प्रस्तुति के लिए धन्यवाद और शुभकामनाएँ 

प्रस्तुत क्षणिकाएँ तनिक और कसावट चाहती हैं. बिम्बात्मकता पर भी काम किया जा सकता था. 

शुभ-शुभ

Comment by Mohammed Arif on January 18, 2018 at 11:44am

बहुत-बहुत आभार आदरणीय विजय निकोर जी । लेखन सार्थक हो गया ।

Comment by vijay nikore on January 18, 2018 at 8:32am

इन क्षणिकाओं का आनन्द और ही है। वाह ! बधाई भाई मोहम्मद आरिफ़ जी।

Comment by Mohammed Arif on January 16, 2018 at 11:43am

बहुत-बहुत आभार आदरणीय सलीम रज़ा साहब ।

Comment by Mohammed Arif on January 16, 2018 at 11:42am

बहुत-बहुत आभार आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब । आपकी टिप्पणी से लेखन सार्थक हो गया ।

Comment by SALIM RAZA REWA on January 15, 2018 at 5:25pm
अति सुंदर मुबारक़बाद क़ुबूल करें.
Comment by Samar kabeer on January 15, 2018 at 3:10pm

जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहिब आदाब,बहतरीन क्षणिकाएं लिखीं आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Mohammed Arif on January 15, 2018 at 11:24am

बहुत-बहुत आभार आदरणीय महेंद्र कुमार जी ।

Comment by Mahendra Kumar on January 15, 2018 at 10:19am

बेहतरीन कटाक्षिकाओं के लिए हार्दिक बधाई आ. मोहम्मद आरिफ़. जी. बहुत ख़ूब. सादर.

Comment by Mohammed Arif on January 15, 2018 at 7:56am

रचना पर अपनी निरपेक्ष प्रतिक्रिया देकर लेखन को सार्थक बनाने का बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय सुरेंद्रनाथ जी ।

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