For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल - अच्छा हुआ जो पाँव से काँटा निकल गया।

बह्र- मफऊल फाइलात मफाईल फाइलुन

संगत खराब थी तभी गुन्डा निकल गया।
अब क्या बतायें हाथ से बेटा निकल गया।

घर से निकल गया मेरे इक दिन किरायेदार,
अच्छा हुआ जो पाँव से काँटा निकल गया।

जिसको खरा समझ के खरीदा था हाट से,
किस्मत खराब थी मेरी खोटा निकल गय।

देखो तो धूल झोंक अदालत की आँख में,
होकर बरी वो ठाठ से झूठा निकल गया।

हिन्दू का घर हो या कि मुसलमान का हो घर,
घर घर अलख जगाता कबीरा निकल गया।

चलते समय जो माँ ने मुझे दी थी कुछ रकम,
काम आया राह का मेरे खर्चा निकल गया।

ऐ शाख तुझसे अब मेरा रिश्ता नहीं रहा,
कहकर हवा के साथ में पत्ता निकल गया।

दुश्मन पे वार करना था तलवार से मग़र,
कमबख्त ऐसे वक्त में हत्था निकल गया।

कितने  दिनों से भूलभुलैया में थे फँसे,

रहमत हुई जो उसकी तो रस्ता निकल गया।

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 145

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on February 18, 2018 at 7:08pm

खूब ग़ज़ल कही आदरणीय...

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 18, 2018 at 5:31pm

आ. भाई राम अवध जी , सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by Rakshita Singh on February 18, 2018 at 2:54pm

आदरणीय राम अवध जी, नमस्कार।

बहुत ही खूबसूरत गजल ..मुबारकबाद कुबूल करें।

Comment by Ram Awadh VIshwakarma on February 17, 2018 at 6:14am

आदर्णीया अनीता जी बहुत बहुत शूक्रिया।

Comment by Ram Awadh VIshwakarma on February 16, 2018 at 9:48pm

आदर्णीय तस्दीक़ अहमद साहब ग़ज़ल पसन्दगी और इस्लाह के लिये शुक्रिया।

Comment by Anita Maurya on February 16, 2018 at 4:04pm

बहुत अच्छी ग़ज़ल

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on February 15, 2018 at 1:39pm

जनाब राम अवध साहिब ,सुन्दर ग़ज़ल हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं । शेर3 सानी अगर यूँ करलें तो और अच्छा हो सकता है।

"किस्मत को क्या कहें वही खोटा निकल गया "

Comment by Ram Awadh VIshwakarma on February 15, 2018 at 11:51am

आदर्णीय मोहम्मद आरिफ साहब हौसलाअफजाई के लिये शुक्रिया। वर्तनी में गल्तियाँ हुई हैं ।ध्यान आकर्षित करने के लिये पन: शुक्रिया

Comment by Mohammed Arif on February 15, 2018 at 7:57am

आदरणीय राम अवध जी आदाब,

                        बहुत ही बढ़िया ग़ज़ल । सबकुछ समा दिया आपने इस ग़ज़ल में । शिकायत भी है , राहत भी है और ऐक्य की बात भी । वाह !  मज़ा आ गया । कुछ वर्तनीगत अशुद्धियाँ हैं । मेरी ओर दिली मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए । बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'गठरी, छतरियां और वह' (लघुकथा)
"आदाब। बहुत-बहुत शुक्रिया मुहतरम जनाब समर कबीर साहिब इस हौसला अफ़ज़ाई हेतु।"
1 hour ago
Md. anis sheikh commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post झूठ फैलाते हैं अक़्सर जो तक़ारीर के साथ (१५)
"आप का ही नहीं गहलोत जी हमारा भी यही हाल है अपनी गलती दिखाई नहीं देती ,और बात सिर्फ गलती पकड़ने कि…"
2 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (दिल ने जिसे बना लिया गुलफाम दोस्तो)
"जनाब राज़ नवाद्वी साहिब, ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया I "
3 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari posted a blog post

एक रदीफ़ पर दो ग़ज़लें "छत पर " (गज़ल राज )

१.हास्य उठाई है़ किसने ये दीवार छत पर  अब आएगा कैसे  मेरा यार छत पर  अगर उसके वालिद  का ये काम…See More
9 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on rajesh kumari's blog post लंगडा मज़े में है (हास्य व्यंग ग़ज़ल 'राज')
"आद० फूल सिंह जी हार्दिक आभार बहुत बहुत शुक्रिया "
9 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on rajesh kumari's blog post लंगडा मज़े में है (हास्य व्यंग ग़ज़ल 'राज')
"आद० नरेन्द्र सिंह जी आपका बहुत बहुत शुक्रिया "
9 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani added a discussion to the group बाल साहित्य
Thumbnail

'अब तुम्हारे हवाले ... बहिनों' ( संस्मरण)

उन दोनों की मैं बहुत शुक्रगुजार हूं। बताऊं क्यूं? क्योंकि इस बार के गणतंत्र दिवस में उन दोनों ने…See More
10 hours ago
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

लेखन में आत्ममुग्धता की बढ़ती प्रवृत्ति और उसके खतरे-एक परिचर्चा /// प्रस्तुति – डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव

 भारतीय संस्कृति में विनम्रता का महत्वपूर्ण स्थान रहा है I अपनी  तारीफ सुनकर आज भी विनम्र लोग शील…See More
12 hours ago
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल

1212     1122     1212     …See More
12 hours ago
Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

एक ग़ज़ल मनोज अहसास

कहते हैं देख लेता है नजरों के पार तूमेरी तरफ भी देख जरा एक बार तूहर बार मान लेता हूं तेरी रजा को…See More
12 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
12 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted blog posts
12 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service