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तुम्हारी कसम.... 

हिज़्र की रातों में
तन्हा बरसातों में
खामोश बातों में
नशीली मुलाकातों में
तुम्हारी कसम
सिर्फ़
तुम ही तुम हो

चांदनी के शबाब में
पलकों के ख्वाब में
प्यालों की शराब में
अर्श के माहताब में
तुम्हारी कसम
सिर्फ़
तुम ही तुम हो

ख्यालों की बाहों में
बेकरार निगाहों में
गुलों की अदाओं में
आफ़ताबी शुआओं में
तुम्हारी कसम
सिर्फ़
तुम ही तुम हो

साँसों के ऐतबार में
आती हुई बहार में
मिलन के करार में
वस्ल के इंतज़ार में
तुम्हारी कसम
सिर्फ़
तुम ही तुम हो

(शुआओं= किरणें )

सुशील सरना

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 860

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Comment by Sushil Sarna on February 20, 2018 at 8:38pm

आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'  जी सृजन के भावों को  मान देने का तहे दिल से शुक्रिया । निजी कारणों से आभार व्यक्त करने में विलम्ब के लिए क्षमा चाहूंगा।

Comment by Sushil Sarna on February 20, 2018 at 8:36pm

आदरणीय  narendrasinh chauhan  जी सृजन के भावों को  मान देने का तहे दिल से शुक्रिया । निजी कारणों से आभार व्यक्त करने में विलम्ब के लिए क्षमा चाहूंगा।

Comment by Sushil Sarna on February 20, 2018 at 8:35pm

आदरणीय  बृजेश कुमार 'ब्रज' जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का तहे दिल से शुक्रिया । निजी कारणों से आभार व्यक्त करने में विलम्ब के लिए क्षमा चाहूंगा।

Comment by Sushil Sarna on February 20, 2018 at 8:34pm

आदरणीय नादिर खान साहिब सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का तहे दिल से शुक्रिया । निजी कारणों से आभार व्यक्त करने में विलम्ब के लिए क्षमा चाहूंगा।

Comment by Sushil Sarna on February 20, 2018 at 8:33pm

आदरणीय रक्षिता सिंह जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का तहे दिल से शुक्रिया । निजी कारणों से आभार व्यक्त करने में विलम्ब के लिए क्षमा चाहूंगा।

Comment by Sushil Sarna on February 20, 2018 at 8:32pm

आदरणीय मो.आरिफ साहिब आदाब ... सृजन को इस दिलकश अंदाज़ से इज़्ज़त बख़्शने का दिल से शुक्रिया सर। निजी कारणों से आभार व्यक्त करने में विलम्ब के लिए क्षमा चाहूंगा।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 19, 2018 at 7:57pm

आ. भाई सुशील जी, बेहतरीन रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by narendrasinh chauhan on February 19, 2018 at 12:59pm

आदरणीय ,खूब सुन्दर रचना 

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on February 18, 2018 at 10:50pm

वाह आदरणीय सुशील बहुतखूब लिखा..और आदरणीय आरिफ जी ने खूब लिखा..वाह

Comment by नादिर ख़ान on February 18, 2018 at 8:46pm

उम्दा  ख़याल  खूबसूरत नक्काशी .... बहुत बधाई आदरणीय सुशील सरना जी 

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