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गीत-भावना में प्रेम का रस घोल प्यारे-रामबली गुप्ता

गीत

भावना में प्रेम का रस घोल प्यारे।
प्रेम जीवन में बड़ा अनमोल प्यारे।
भावना में.........

शब्द-शर मुख से निकल कर लौटते कब?
घाव ये गहरे करें हिय में लगें जब।
कर न दें आहत किसी को शब्द तेरे,
मृृदु मधुुुर मकरन्द वाणी बोल प्यारे।
भावना में ........

मत बड़ा छोटा किसी को मान जग में।
काम आ जाए भला कब कौन मग में?
स्नेह का सम्बन्ध ही सबसे उचित है,
तथ्य यह मन की तुला में तोल प्यारे।
भावना में........

क्यों मनुज ही, पशु-विहग को भी क्षुधा है।
स्नेह तो सबके लिए अनुपम सुधा है।
स्नेह के बस में सकल जग जगतपति भी,
स्नेह से हिय स्नेहनिधि का मोल प्यारे।
भावना में..........

है मनुज तू मनुजता का मान भी रख।
बंधु-बांधव के लिये सम्मान भी रख।
सौख्य देकर सौख्य ही प्रतिफल मिले औ'-
दुख मिटेंगे द्वार सुख के खोल प्यारे।
भावना में.........

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by रामबली गुप्ता on February 21, 2018 at 11:40am

धन्यवाद भाई लक्ष्मण धामी जी

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 21, 2018 at 8:19am

आ. भाई रामबली जी, सुंदर गीत हुआ है हार्दिक बधाई ।

Comment by रामबली गुप्ता on February 18, 2018 at 11:25pm

हृदय से आभार आदरणीय बृजेश कुमार जी

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on February 18, 2018 at 11:23pm

अनुपम सरस रचना हुई आदरणीय..सादर

Comment by रामबली गुप्ता on February 18, 2018 at 9:38pm

सादर आभार आदरणीया रक्षिता सिंह जी

Comment by रामबली गुप्ता on February 18, 2018 at 9:37pm

आदरणीय आरिफ़ जी हृदय से धन्यवाद

Comment by रक्षिता सिंह on February 18, 2018 at 12:43pm

आदरणीय रामबली जी ,

प्रेम व स्नेह पर केन्द्रित बहुत ही सुन्दर गीत।

हार्दिक बधाई।

Comment by Mohammed Arif on February 18, 2018 at 7:36am

आदरणीय राम बली गुप्ता जी आदाब,

                                सुंदर प्रेम की भावना से ओतप्रोत गीत । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

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