For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

छोटी सी ज़िन्दगी में किसे ख़ुश बता करूँ

221 2121 1221 212

***********

छोटी सी ज़िन्दगी में किसे ख़ुश बता करूँ,

ज़लता चराग़ हूँ मैं अँधेरे का क्या करूँ ।

कैसे सुनाऊँ सबको महब्बत की दास्ताँ,

या फिर बता दो दर्द वो कैसे सहा करूँ ।

ये माना ख़ुद की फ़िक्र में इतना नहीं सकूँ,

जो मिलता ज़ख्म-ए-ग़ैर के मरहम मला करूँ ।

दस्तक़ तू दे ऐ मौत, मज़ा तब है, हो नशा,

मैं जब खुदा के ध्यान में सिमरण किया करूँ ।

जब हो नसीब में ये तग़ाफ़ुल ये बेरुख़ी,

तो बे-हया ये ज़िन्दगी कैसे ज़िया करूँ ।

तगाफुल=उपेक्षा, ग़फ़लत

*********

मौलिक व अप्रकाशित

हर्ष महाजन

Views: 776

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by somesh kumar on March 15, 2018 at 1:06pm

sahmiti k lie shukriya pr khani me sher k sath aapka naam de pana mushkil lg rha hai.islie agr aapki svikriti nhi hai to koi smsya nhi.

Comment by Harash Mahajan on March 15, 2018 at 12:54pm

आदरणीय सोमेश कुमार जी आपकी आमद और प्रोत्साहित भरे शब्दों के लिए तहे दिल से शुक्रिया । उम्मीद करता हूँ आप यूँ ही आते रहेंगे ।ये मेरा अहो भाग्य है कि आपको ये शेर पसंद आया ।

आपने ग़ज़ल के जिस शेर के बारे में अपनी प्रतिलिपि में इस्तेमाल करने की बात कर रहे हैं , मेरे नाम के साथ ज़रूर इस्तेमाल कर सकते हैं ।  

सादर ।

Comment by somesh kumar on March 15, 2018 at 8:25am

कैसे सुनाऊँ सबको महब्बत की दास्ताँ,

या फिर बता दो दर्द वो कैसे सहा करूँ ।

sir aap ka ye sher behad psand aaya. actually pratilipi pe maine ek story send ki hai jis ka byaan ye sher kr rha hai.agr aap ki svikriti ho to ise us story me use krna chaunga.aap k jawab ki prtiksha hai

Comment by Harash Mahajan on March 14, 2018 at 8:02pm

रचना के अनुमोदन और हौसला अफज़ाई का बहुत-बहुत हार्दिक आभार आदरणीय ब्रजेश कुमार ब्रज जी ...सादर ।

Comment by Harash Mahajan on March 14, 2018 at 8:01pm

ग़ज़ल पर आपकी आमद और हौसला अफज़ाई का बहुत-बहुत हार्दिक आभार आदरणीय अजय तिवारी जी । सादर ।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on March 14, 2018 at 7:50pm

बड़ी उम्दा ग़ज़ल कहने की कोशिश की है आपने..सादर

Comment by Ajay Tiwari on March 14, 2018 at 7:34pm

आदरणीय हर्ष जी, अच्छी कोशिश है. हार्दिक बधाई 

Comment by Harash Mahajan on March 14, 2018 at 2:26pm

 आदरणीय लक्ष्मण धामी जी आपकी आमद और प्रोत्साहन भरी टिप्पणी के लिए बहुत बहुत शुक्रिया ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 14, 2018 at 1:26pm

अच्छी गजल हुई है हार्दिक बधाई ।

Comment by Harash Mahajan on March 13, 2018 at 11:43pm

आदरणीय समर जी आदाब । आपके स्नेहिल और प्रोत्साहन भरे शब्दों के लिए दिली शुक्रिया । 

साभार ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

तब मनुज देवता हो गया जान लो,- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२१२/२१२/२१२/२१२**अर्थ जो प्रेम का पढ़ सके आदमीएक उन्नत समय गढ़ सके आदमी।१।*आदमीयत जहाँ खूब महफूज होएक…See More
6 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . रिश्ते
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुंदर दोहै हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
7 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . रिश्ते

दोहा पंचक. . . . रिश्तेमिलते हैं  ऐसे गले , जैसे हों मजबूर ।संबंधों को निभा रहे, जैसे हो दस्तूर…See More
21 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन व आभार।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई रवि जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और सुंदर सुझाव के लिए हार्दिक आभार।"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"बेशक। सच कहा आपने।"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"मेरा प्रयास आपको अच्छा और प्रेरक लगा। हार्दिक धन्यवाद हौसला अफ़ज़ाई हेतु आदरणीय मनन कुमार सिंह जी।"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ नववर्ष की पहली गोष्ठी में मेरी रचना पर आपकी और जनाब मनन कुमार सिंह जी की टिप्पणियों और…"
yesterday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"प्रेरक रचना।मार्ग दिखाती हुई भी। आज के समय की सच्चाई उजागर करती हुई। बधाइयाँ लीजिये, आदरणीय उस्मानी…"
yesterday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"दिली आभार आदरणीया प्रतिभा जी। "
yesterday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"हार्दिक आभार आदरणीय उस्मानी जी। "
yesterday
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"आजकल खूब हो रहा है ये चलन और कभी कभी विवाद भी। आपकी चिरपरिचित शैली में विचारोत्तेजक लघुकथा। बधाई…"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service