For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

चाँद बन जाऊंगी ..

चाँद बन जाऊंगी ..

कितनी नादान हूँ मैं
निश्चिंत हो गई
अपनी सारी
तरल व्यथा
झील में तैरते
चाँद को सौंपकर

हर लम्हा जो
एक शिला लेख सा
मेरे अवचेतन में
अंगार सा जीवित था
निश्चिंत हो गई
उसे
झील में तैरते

चाँद को सौंपकर

उम्र कैसे फिसल गई
अपने तकिये पर
तुम्हारी गंध को
सहेजते -सहेजते
कुछ पता न चला
निश्चिंत हो गई
अपनी चेतना के जंगल में व्याप्त
श्वासों में जीवित
श्वासों की गंध को
झील में तैरते

चाँद को सौंपकर

मिलूंगी
मैं
मेरे बाद भी
यहीं
तुम्हें ढूंढते हुए
मिलोगे तुम भी
मुझे
यहीं
इसी झील पर तैरती
मेरी कल्पनाओं की छवि को
साकार करते हुए


उस दिन
हाँ, उस दिन

मैं
पूर्णतः और अपूर्णतः के
मध्य की महीन दूरी को मिटा
निश्चिंत हो जाऊंगी
तुम्हारी अदृश्यता में
स्वयं के शेष को

समाहित कर
चाँद बन जाऊंगी
स्वयं को
झील में तैरते

चाँद को सौंपकर

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 63

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sushil Sarna on May 1, 2018 at 12:48pm

आदरणीय बृजेश कुमार ब्रज जी प्रस्तुति को अपना स्नेह देने का दिल से आभार।

Comment by Sushil Sarna on May 1, 2018 at 12:47pm

आदरणीय विजय निकोर जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार।

Comment by Sushil Sarna on May 1, 2018 at 12:46pm

आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब ... प्रस्तुति आपकी मधुर प्रशंसा की आभारी है।

Comment by Sushil Sarna on May 1, 2018 at 12:46pm

आदरणीय हर्ष महाजन जी सृजन को मान देने का दिल से आभार।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on April 27, 2018 at 4:25pm

वाह आदरणीय कितने सुन्दर भावों की उतनी ही खूबसूरती से समेटा है..

Comment by Neelam Upadhyaya on April 25, 2018 at 11:08am

 आदरणीय सुशील सरना जी, बहुत सुंदर कविता । बधाई ।

Comment by Samar kabeer on April 24, 2018 at 6:01pm

जनाब सुशील सरना जी आदाब,बहुत उम्दा कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Harash Mahajan on April 24, 2018 at 5:51pm

बहुत ही सुंदर आदरणीय सुशील जी ।

Comment by Sushil Sarna on April 24, 2018 at 4:01pm

आदरणीय श्याम नारायण जी सृजन को मान देने का दिल से आभार।

Comment by Shyam Narain Verma on April 23, 2018 at 12:31pm
सुंदर भाव से संजोयी रचना पर बधाई स्वीकारें आदरणीय, सादर

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"बहुत उम्दा राय है जनाब समर साहब मज़ा आ गया इस टिप्स पे ... "
4 minutes ago
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"रोज़ उठता है किसी सच का जनाज़ा देखो झूठ बैठा है यहाँ बन के दरोगा देखो   हो रहा रोज़ नया एक तमाशा…"
14 minutes ago
Mohan Begowal replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"     सब हैं अपने किसी को भी न पराया देखो हो न जाये कहीं झूठा दिल निभाया देखो कौन अब…"
30 minutes ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"आ. मोहन जी,प्रति सदस्य एक ही रचना प्रेषित करने   का नियम है  नियम एवं…"
40 minutes ago
TEJ VEER SINGH commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post ग़ज़ल (गणेश जी बागी)
"हार्दिक बधाई आदरणीय गणेश जी बागी जी। लाज़वाब गज़ल।"
1 hour ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"जनाब दिनेश जी, 'किस क़दर रक़सां है इंसान तमाशा देखो फ़ानी दुनिया में तमन्नाओं का जलवा…"
1 hour ago
TEJ VEER SINGH commented on मेघा राठी's blog post लघुकथा
"हार्दिक बधाई आदरणीय मेघा जी। लाज़वाब लघुकथा।"
1 hour ago
TEJ VEER SINGH commented on Mohan Begowal's blog post किराये के रिशते (लघुकथा)
"हार्दिक बधाई आदरणीय मोहन जी। बेहतरीन लघुकथा।"
1 hour ago
TEJ VEER SINGH commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post चाय पर चर्चा (लघुकथा)
"हार्दिक बधाई आदरणीय शेख उस्मानी जी। बेहतरीन कटाक्ष पूर्ण लघुकथा।"
1 hour ago
TEJ VEER SINGH commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post छोटा वकील (लघुकथा)
"हार्दिक बधाई आदरणीय शेख उस्मानी जी। अच्छी व्यंगपूर्ण लघुकथा।"
1 hour ago
Samar kabeer commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post ग़ज़ल (गणेश जी बागी)
"जनाब राम अवध जी आदाब,ऐब-ए-तनाफ़ुर उसे कहते हैं कि जिस अक्षर पर जुमला ख़त्म हो रहा है,उसी अक्षर से…"
2 hours ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"सर, एक मज़े की बात बताऊँ?? यहाँ मैं इतना ज्ञान दे रहा हूँ लेकिन अपनी ख़ुद की ग़ज़ल में ये शेर कहा है…"
4 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service