For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

बुजुर्ग हमारे पराली नही होते...........[सामजिक सरोकार]

बुजुर्ग यानि हमारे युवा घर की आधुनिकतावाद की दौड़ में डगमगाती इमारत के वो मजबूत स्तम्भ होते हैं जिनकी उपस्थिति में कोई भी बाहरी दिखावा नींव को हिला नही सकता.उनके पास अपनी पूरी जिन्दगी के अनुभवों का पिटारा होता हैं जिनके मार्ग दर्शन में ये नई युवा पीढ़ी मायावी दुनिया में भटक नही सकती,लेकिन आज के दौर में बुजुर्गों को बोझ समझा जाने लगा हैं.उनकी दी हुई सीखे दकियानूसी बताई जाती हैं .ऐसा ही मैंने एक लेख में पढ़ा था जिसमे बुजुर्गों को पराली की संज्ञा दी गई.पराली वो होती हैं जो अनाज के काटने के बाद,ऊपरी हिस्सा बचता हैं उसे घर में न रखकर जलाकर नष्ट कर दिया जाता हैं या फिर उसे किसी कचरे के ढेर में फेक दिया जाता हैं,जहां उसमे जानवर भी भूख नही मारते.बुजुर्गों को पराली कहना कुछ गले से नही उतरा.आखिर वो बुजुर्ग जिन्होनें हमे अपनी ऊँगली पकडकर चलना सिखाया,जिन्होंने हमे अच्छे-बुरे की परख करवाई वो कैसे पराली हो सकते हैं??????पराली तो वो अनाज फलित तने के हिस्से से जुड़ा रहता हैं.पराली से ही तो फलता हैं,फूलता हैं और एक उपयोगी हिस्सा बनता हैं,पराली के बिना उसका क्या अस्तित्व????? ऐसे ही हमारे घर के बुजुर्ग हैं जिनके बिना हमारा कोई अस्तित्व नही......,जिनके बिना हमारे जीवन का कोई सार नही......यह सत्य बात हैं एक समय बाद उनकी जिम्मेदारियां न के बराबर हो जाती है.अब ,आज किसी को उनकी आवश्यकता नही होती लेकिन यह धारणा गलत होती हैं.हमे आज भी उनकी उतनी ही जरूरत होती हैं जितनी कि कल थी.आज तो आधुनिक समय में सभी का जीवन उच्च तकनीकी से अछूता नही रह गया हैं,ऐसे में हमे उन्हें बोझ न समझकर और न ही उन्हें अपने आप को,समाज और घर के लिए बोझिल न समझे.उन्हें उनकी दक्षता,काबलियत के हिसाब से उनका जीवन सार्थक बना देना चाहिए जिससे वो एक स्वाभिमानी की जिन्दगी व्यतीत कर सके.कहने का बस इतना सा तात्पर्य हैं कि बुजुर्ग हमारे पराली नही हैं.पराली को बेकार न समझकर उसे नष्ट न करे या न किसी अनुपयोगी जगह पर फेके[बुजुर्गो के लिए ब्रद्धाश्रम ]बल्कि उससे उपयोगी बनाकर उसको महत्वपूर्ण बनाया जा सकता हैं.वस्तु हो या इन्सान कभी कोई बेकार नही होता.कहते भी हैं कि बंद घड़ी भी चौबीस घंटे में दो बार सही समय बताती हैं.फिर ये हमारे घर की धरोहर हैं जिन्हें बहुत ही सहेज कर रखना चाहिए...बस,देखने का और समझने का नजरियाँ होता हैं,इसलिए बुजुर्गों को पराली नही बनने दीजिये.....

   रचना मौलिक और अप्रकाशित हैं.

      बबीता गुप्ता 

 

Views: 510

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by babitagupta on May 14, 2018 at 5:55pm

सराहना करने के लिए आप सभी का सधन्यवाद. 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 2, 2018 at 10:12am

आ. अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई।

Comment by Neelam Upadhyaya on May 1, 2018 at 4:06pm

आदरणीय बबिता जी, नमस्कार।  बढ़िया आलेख की प्रस्तुति पर  बधाई  स्वीकार करें। 

Comment by Samar kabeer on April 30, 2018 at 10:22am

ये तो टालने वाली बात हुई?

Comment by babitagupta on April 30, 2018 at 7:09am

प्रतिक्रया देने के लिए आप सभी का सधन्यवाद. 

Comment by Samar kabeer on April 29, 2018 at 8:17pm

मोहतरमा बबीता गुप्ता जी आदाब,सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।

मंच पर आपकी सक्रियता रचना पोस्ट करने तक सीमित है,आप तो आपकी रचना पर आई टिप्पणियों के उत्तर भी नहीं देतीं? कृपया मंच पर अपनी सक्रियता दिखाएँ ।

Comment by Nilesh Shevgaonkar on April 29, 2018 at 9:14am

आ. बबिता जी 
बड़ों को पराली समझने वाले विकृत मानसिकता के लोग हैं.. 
बंद घड़ी वाला उदाहरण अच्छा लगा ..सही शब्द वृद्धाश्रम है..
आलेख के लिए बधाई 
सादर 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"   आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब, सादर नमस्कार, प्रदत्त चित्र पर आपने सुन्दर…"
6 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"चौपाई * बन्द शटर हैं  खुला न ताला।। दृश्य सुबह का दिखे निराला।।   रूप  मनोहर …"
11 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"शुभ प्रभात,  आदरणीय! चौपाई छंद:  भेदभाव सच सदा न होता  वर्ग- भेद कभी सच न…"
16 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"चौपाई छंद +++++++++ करे मरम्मत जूते चप्पल। काम नित्य का यही आजकल॥ कटे फटे सब को सीता है। सदा…"
17 hours ago
Admin replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"स्वागतम"
yesterday
Admin posted discussions
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . घूस

दोहा सप्तक. . . . . घूसबिना कमीशन आजकल, कब होता है काम ।कैसा भी हो काम अब, घूस हुई है आम ।।घास घूस…See More
Wednesday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . प्यार

दोहा सप्तक. . . . प्यारप्यार, प्यार से माँगता, केवल निश्छल प्यार ।आपस का विश्वास ही, इसका है आधार…See More
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई चेतन जी, उत्साहवर्धन व स्नेह के लिए आभार।"
Feb 15
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
Feb 15
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ.लक्ष्मणसिह धानी, 'मुसाफिर' साहब  खूबसूरत विषयान्तर ग़ज़ल हुई  ! हार्दिक …"
Feb 15
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर मुक्तक हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Feb 15

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service