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कहाँ खो गया??????[कविता]

कच्ची उम्र थी,कच्चा रास्ता,

पर पक्की दोस्ती थी,पक्के हम,

उम्मीदों का,सपनों का कारवां साथ लेकर चलते,

स्वयं पर भरोसा कर,कदम आगे बढाते,

कर्म भूमि हो या जन्म भूमि,हमारी पाठशाला होती,

काल,क्या??किसी व्यतीत क्षणों का पुलिंदा मात्र नही,

बल्कि इसमे हर वो घटना होती,जिसके हमारी  भागीदारी होती,

बेलगाम तेज भागती ,जिन्दगी की रफ्तार में,

लगाम खिंच गई,शहरी आपा-धापी में,

धरती की नींव में अपनी रूढ़ जमायें,

जिसमे हैं मेरा अतीत समाया,

जानता,समझता सब,फिर भी मैं अविराम चलता,

दिन-रात समय की चक्की में पाटों में पिस्ता जाता,

उफ़!!!!!कहाँ खो गया?????,मेरा 'सुकोमल पुष्पों-सा जीवन'.

रचना मौलिक व अप्रकाशित हैं.

बबीता गुप्ता 

Views: 540

Comment

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Comment by babitagupta on May 6, 2018 at 8:14pm

आप सभी का सधन्यवाद.

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on May 6, 2018 at 3:03pm

वाह सुन्दर कविता..

Comment by vijay nikore on May 6, 2018 at 11:47am

अच्छी रचना के लिए बधाई

Comment by babitagupta on May 5, 2018 at 4:43pm

सधन्यवाद,आदरणीय समर सर.

Comment by Samar kabeer on May 5, 2018 at 11:22am

मोहतरमा बबीता गुप्ता जी आदाब,बहुत अच्छी लगी आपकी कविता,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by babitagupta on May 4, 2018 at 6:21pm

रचना की सराहना करने के लिए आप सभी का सधन्यवाद.

Comment by Sushil Sarna on May 4, 2018 at 4:01pm

उफ़!!!!!कहाँ खो गया?????,मेरा 'सुकोमल पुष्पों-सा जीवन'.
अति सुंदर भावों का सम्प्रेषण .... हार्दिक बधाई स्वीकार करें आदरणीया बबितगुप्ता जी।

Comment by Shyam Narain Verma on May 4, 2018 at 2:48pm
इस सुंदर प्रस्तुति के लिए तहे दिल बधाई सादर
Comment by Harash Mahajan on May 4, 2018 at 2:20pm

सुंदर भाव आदरणीय बबिता गुप्ता जी |

"

कच्ची उम्र थी,कच्चा रास्ता,

पर पक्की दोस्ती थी,पक्के हम,"

बहुत खूब !!

सादर !

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