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क्षणिकाएं :

१.
तूफ़ान का अट्टहास
विनाश का आभास
काँपती रही
लौ दिए की
झील की लहरों पर
देर तक
आंधी के साथ हुए
जीवन मृत्यु के संघर्ष को
याद करके

२.
श्वास
नितांत अकेली
देह
चिता की सहेली
जीवन
अनबुझ पहेली

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 612

Comment

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Comment by Sushil Sarna on May 29, 2018 at 7:41pm

आदरणीय डॉ छोटेलाल सिंह जी सृजन के भावों पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से शुक्रिया।

Comment by Sushil Sarna on May 29, 2018 at 7:41pm

आदरणीय विजय निकोर जी , सादर प्रणाम ... सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार।

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on May 29, 2018 at 8:34am

आदरणीय सुशील सरना जी सादर अभिवादन कम से कम शब्दों में जो चित्र आपने उकेरा है लाजबाब है ,बेहतरीन भावपूर्ण सर्जना के लिए बहुत बहुत बधाई

Comment by Sushil Sarna on May 25, 2018 at 5:36pm
आदरणीया नीलम उपाध्याय जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार।
Comment by Sushil Sarna on May 25, 2018 at 5:36pm
आदरणीया बबिता गुप्ता जी सृजन आपकी स्नेहिल प्रशंसा का आभारी है।
Comment by Sushil Sarna on May 25, 2018 at 5:36pm

आदरणीय शेख उस्मानी साहिब, आदाब। ... सर सृजन के भावों को आत्मीय स्नेह देने का दिल से आभार।

Comment by Neelam Upadhyaya on May 24, 2018 at 3:48pm

आदरणीय सुशिल सरना जी, नमस्कार।  जीवन की सत्यता को दर्शाती सूंदर क्षणिकाएं।  रचना की प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई।

Comment by babitagupta on May 24, 2018 at 1:40pm

विचारोत्तेजक पंक्तियाँ सत्यता को उजागर करती,बधाई व्विकार कीजिये आदरणीय सर जी.

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on May 24, 2018 at 1:33am

बहुआयामी मार्गदर्शक/विचारोत्तेजक क्षणिकाओं के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब सुशील सरना  साहिब।

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