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"दर्द वो इस तरह छुपाता है"

2122 1212 22

हर समय खूब मुस्कुराता है।
दर्द वो इस तरह छुपाता है।।

वक़्त अच्छा बुरा जो आता है।
कुछ न कुछ तो सबक सिखाता है।।

दोस्त सच्चा उसे कहा जाता।
साथ जो हर कदम निभाता है।।

वो सकूँ से कभी नहीं रहता।
दिल किसी का भी जो दुखाता है।।

एक दिन ख़ुद मज़ाक बनता वो।
जो किसी का मज़ाक उड़ाता है।।

अब यकीं किस तरह करूँ उस पर।
जो न वादा कभी निभाता है।।

दर्द अल्फाज में अगर ढाले।
शाइरी में निख़ार आता है।।

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment

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Comment by vijay nikore on August 1, 2018 at 2:04pm

सुरेन्द्र जी, आपकी गज़ल अच्छी लगी। बधाई।

Comment by gumnaam pithoragarhi on July 31, 2018 at 4:57pm

वाह बहुत खूबसूरत ग़ज़ल .................बधाई .....

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on July 29, 2018 at 2:19pm

अच्छी ग़ज़ल कही है आदरणीय...बधाई

Comment by Neelam Upadhyaya on July 27, 2018 at 12:35pm

आदरणीय सुरेंद्र इंसान जी, बेहतरीन रचना के  लिए हार्दिक  बधाई । 

 
 

Comment by babitagupta on July 25, 2018 at 7:23pm

वक्त अच्छा बुरा जो आता हैं 

कुछ न कुछ तो  सबक सिखा जाता हैं.

बेहतरीन पंक्तियाँ,हार्दिक बधाई स्वीकार कीजियेगा आदरणीय सरजी।

Comment by Shyam Narain Verma on July 25, 2018 at 2:39pm
बहुत खूब ! इस सुंदर गजल हेतु बधाई स्वीकारें ।
Comment by TEJ VEER SINGH on July 25, 2018 at 12:29pm

हार्दिक बधाई आदरणीय सुरेंद्र इंसान जी।बेहतरीन गज़ल।

हर समय खूब मुस्कुराता है।
दर्द वो इस तरह छुपाता है।।

Comment by Samar kabeer on July 25, 2018 at 12:01pm

जनाब सुरेन्द्र इंसान जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा हुआ है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।

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