For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

दिख रहा इंसान है- ग़ज़ल

हर तरफ बस दिख रहा इंसान है
हाँ, मगर अपनों से वो अंजान है

थे कभी रिश्ते भी नाते भी मगर
आजतो यह सिर्फ इक सामान है

जिसको कहते थे कभी काबिल सभी
सबकी नज़रों में वो अब नादान है 

जिसको सौंपी थी हिफाज़त बाग़ की
बिक रहा उसका ही अब ईमान है 

हर तरफ बैठे शिकारी घात में
चंद लम्हों का वो अब मेहमान है

था कभी गुलज़ार जो शाम-ओ-सहर 
अब वही दिखने लगा शमशान है

जिसने देखे अम्न के सपने कभी
अब उसी का टूटता अरमान है 

जिसपे थे दंगों के छींटे कल विनय
अब वही तो क़ौम का भगवान है !!

मौलिक एवम अप्रकाशित

Views: 762

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by विनय कुमार on August 7, 2018 at 11:56am
बहुत बहुत आभार आ तस्दीक़ अहमद खान साहब
Comment by विनय कुमार on August 7, 2018 at 11:56am
बहुत बहुत आभार आ रवि शुक्ला साहब
Comment by Ravi Shukla on August 6, 2018 at 11:53pm

आदरणीय विनय जी , ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है बधाई स्वीकार करें

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on August 6, 2018 at 10:02pm

जनाब विनय कुमार साहिब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है   , मुहतरम समर साहिब के मशवरे से ग़ज़ल में निखार आ गया है , मुबारकबाद क़ुबुल फरमाएं l 

Comment by विनय कुमार on August 6, 2018 at 5:05pm

बहुत बहुत आभार आ नीलम उपाध्याय जी

Comment by Neelam Upadhyaya on August 6, 2018 at 4:51pm

आदरणीय विनय  कुमार जी, अच्छी रचना की प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई । 

Comment by विनय कुमार on August 6, 2018 at 11:54am

बहुत बहुत आभार आ संतोष खिरवाडकर जी

Comment by विनय कुमार on August 6, 2018 at 11:53am

बहुत बहुत आभार आ मुहतरम समर कबीर साहब, आपके निर्देशानुसार मैंने परिवर्तन कर दिया है. इसी तरह मार्गदर्शन करते रहिये, आभार

Comment by santosh khirwadkar on August 5, 2018 at 7:26pm

आदरणीय विनय जी , ग़ज़ल का शानदार प्रयास!

Comment by Samar kabeer on August 5, 2018 at 3:03pm

जनाब विनय कुमार जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,लेकिन ग़ज़ल अभी समय चाहती है,कई मिसरे बह्र में नहीं हैं ।

'मगर वह अपनों से ही अंजान है'

इस मिसरे को यूँ कर लें :-

'हाँ, मगर अपनों से वो अंजान है'

'कभी रिश्ते भी थे नाते थे, मगर'

इस मिसरे को यूँ कर लें:-

'थे कभी रिश्ते भी नाते भी मगर'

'जिसे कहते थे कभी काबिल सभी
सबकी नज़रों में अभी नादान है'

इस शैर को यूँ कर लें '-

'जिसको कहते थे कभी क़ाबिल सभी

सबकी नज़रों में वो अब नादान है'

'जिसको सौंपी थी हिफाज़त चमन की
वही तो सबसे बड़ा बेइमान है'

इस शैर को यूँ कर लें :-

'जिसको सौंपी थी हिफ़ाज़त बाग़ की

बिक रहा उसका ही अब ईमान है'

'कभी था गुलज़ार जो शामों सुबह
वही अब तो दिख रहा शमसान है'

इस शैर को यूँ कर लें :-

'था कभी गुलज़ार जो शाम-ओ-सहर

अब वही दिखने लगा शमशान है'

'जिसने देखे अमन के सपने कभी
उसी का अब टूटता अरमान है'

इस शैर को यूँ कर लें :-

'जिसने देखे अम्न के सपने कभी

अब उसी का टूटता अरमान है'

'वही अब तो, कौम का भगवान है'

इस मिसरे को यूँ कर लें :-

'अब वही तो क़ौम का भगवान है'

बाक़ी शुभ शुभ ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  आदरणीय,  तकनीकी दृष्टिकोण से मैं कुछ  अधिक नहीं कह सकता । किन्तु यदि हमारा …"
Jun 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी विद्वद्जन अपने-अपने हिसाब कुछ न कुछ चर्चा कर रहे हैं, उपाय बता रहे हैं, आदरणीय ..  आप भी…"
Jun 12
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" आदरणीय सौरभ साहब,  अंततोगत्वा कुछ ऐसा प्रबंध तो होना ही चाहिए कि ओ,बी,ओ पराभव को प्राप्त…"
Jun 12
जगदानन्द झा 'मनु' added a discussion to the group मैथिली साहित्य
Thumbnail

भक्ति गजल

सजल कन्हाइ रूपक रस बहाबैएहरिक ई रूप दुनियाकेँ रिझाबैएमुकुटपर पैंख मोरक मोहनी सोहैहियामे रस सिनेहक ई…See More
Jun 11

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  उत्साहित बने रहने और सतत चलते रहने के सुझाव से निस्सृत होती सकारात्मकता का आयाम आश्वस्तिकारी…"
Jun 8
धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जब कविता कोश चल सकता है तो ओबीओ क्यूँ नहीं। वहाँ भी शुरू में जो लोग थे आज नहीं हैं। नए-नए लोग…"
Jun 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"चर्चा में आपकी उपस्थिति तथा आपके भावमय शब्दों का स्वागत है आदरणीय मिथिलेश जी. "
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "प्यारी दुश्मन" -[लघु कथा] (18)
"मेरी इस रचना के अवलोकन हेतु पाठकों को हार्दिक धन्यवाद।"
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "शह और शिकस्त" - [लघुकथा] 25 (शतरंज संदर्भित) - शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"मेरी इस रचना पर 446 अवलोकन हेतु हार्दिक आभार पाठकों के प्रति।"
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post सूरज के तेवर (लघुकथा) [छंदोत्सव-58 चित्र से प्रेरित] /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"रचना पटल पर उपस्थिति, समीक्षात्मक टिप्पणी और सवाल हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया कान्ता रॉय जी। मेरी…"
Jun 5
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" सादर नमस्कार आदरणीय मंच। कुछ अन्य सुझाव: 1- सदस्यों से सहयोग राशि एकत्रित कर ओबीओ की पत्रिका…"
Jun 1
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अच्छा सुझाव"
Jun 1

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service