For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

राखी

राखी धागा प्रेम का, कर लेना स्वीकार

केवल ये धागा नहीं,जनम जनम का प्यार ll

बहना तेरी खुश रहे,ऐसा करना काम

मान धर्म रखना सभी, होवे ना बदनाम ll

रिश्ता ये अनमोल है,समझो इसका मोल

पावन रिश्ते को कभी, पैसे से ना तोल ll

प्रेम झलकता एक दिन,फिर करते तकरार

दुख सहती बहना अगर, ये कैसा है प्यार ll

दिल से बहना को सभी, देना स्नेह दुलार

याद करे बहना कभी,मत करना इनकार ll

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 200

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on August 27, 2018 at 7:30pm

भाई सुरेन्द्र जी उत्साह वर्धन के लिए आपका बहुत बहुत आभार

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on August 27, 2018 at 7:29pm

आदरणीया बविता जी आपके उत्साह वर्धन से नई ऊर्जा मिली दिल से शुक्रिया

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on August 27, 2018 at 7:27pm

आदरणीय विजय निकोर साहब कविता को मान देने के लिए दिल से आभार

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on August 27, 2018 at 7:26pm

आदरणीय समर साहब जी सादर अभिवादन आपके उत्साह वर्धन से मन प्रसन्न हुआ दिल से आभार

Comment by Samar kabeer on August 27, 2018 at 4:54pm

जनाब डॉ.छोटेलाल सिंह जी आदाब,रक्षा बंधन पर बहुत अच्छे दोहे रचे आपने,इस  प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by vijay nikore on August 27, 2018 at 2:24pm

वाह, आनन्द आ गया। हार्दिक बधाई, आदरणीय छोटेलाल सिंह जी।

Comment by babitagupta on August 26, 2018 at 9:47pm

भाई बहिन के अटूट बंधन के पर्व पर उम्दा रचना,बधाई स्वीकार कीजियेगा आदरणीय सरजी।

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on August 26, 2018 at 2:25pm

आद0 भैया डॉ. छोटेलाल सिंह जी सादर अभिवादन। प्रासंगिक और समयानुकूल बेहतरीन दोहों के सृजन पर बहुत बाह्य बधाई देता हूँ।

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on August 26, 2018 at 1:54pm

आदरणीय शेख सहजाद साहब बहुत बहुत शुक्रिया आपका

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on August 26, 2018 at 12:51pm

आदाब। बेहतरीन यथार्थपूर्ण प्रेरक छंद सृजन। पावन रक्षाबंधन पर्व की हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनाएं जनाब डॉ. छोटे लाल सिंह साहिब।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post "मुहब्बत की नहीं मुझसे " , प्रिये ! तुम झूठ मत बोलो |  (५३ )
"बहुत बहुत आभार Amit Kumar "Amit"  जी उत्साहवर्धन के लिए "
2 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post ग़म को क़रीब से कभी देखा है इसलिए(५१)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय  Samar kabeer साहेब |  सलामत रहें | "
2 hours ago
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted photos
2 hours ago
Sushil Sarna posted a photo
2 hours ago
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted an event

ओबीओ, लखनऊ चैप्टर at 37, रोहतास एन्क्लेव,

July 28, 2019 from 4pm to 7pm
ओबीओ, लखनऊ चैप्टर की मासिक गोष्ठी माह जूलाई  2019 See More
2 hours ago
DR. HIRDESH CHAUDHARY posted a blog post

बृज क्षेत्र का सावन और उसका सौंदर्य

मदमस्त चलती हवाएं और कार में एफएम पर मल्हार सुनकर, पास बैठी मेरी सखी साथ में गाना गाने लगती है…See More
2 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted a blog post

बीच समंदर कश्ती छोड़े धोका गर मल्लाह करे (५४)

बीच समंदर कश्ती छोड़े धोका गर मल्लाह करे मंज़िल कैसे ढूंढोगे जब रहबर ही गुमराह करे **आज हुआ है…See More
2 hours ago
Amit Kumar "Amit" commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post "मुहब्बत की नहीं मुझसे " , प्रिये ! तुम झूठ मत बोलो |  (५३ )
"आदरणीय गिरधारी सिंह गहलोत तुरंत बीकानेरी जी एक खूबसूरत गीत कहने के लिए बहुत-बहुत बधाईयां।"
4 hours ago
Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post ग़म को क़रीब से कभी देखा है इसलिए(५१)
"मतला यूँ कर सकते हैं:- 'ग़म को क़रीब से मियाँ देखा है इसलिए अपना ही दर्द ग़ैर का लगता है…"
6 hours ago
कृष्णगोपाल बघेल is now a member of Open Books Online
11 hours ago
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या माह जून 2019 – एक प्रतिवेदन डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

चढा असाढ, गगन घन गाजा । साजा बिरह दुंद दल बाजा ॥ धूम, साम, धीरे घन धाए । सेत धजा बग-पाँति देखाए ॥…See More
12 hours ago
Samar kabeer commented on Samar kabeer's blog post ओ.बी.ओ.की 9 वी सालगिरह का तुहफ़ा
"जनाब गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब,ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका धन्यवाद,आपको भी ओबीओ की…"
13 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service