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राखी

राखी धागा प्रेम का, कर लेना स्वीकार

केवल ये धागा नहीं,जनम जनम का प्यार ll

बहना तेरी खुश रहे,ऐसा करना काम

मान धर्म रखना सभी, होवे ना बदनाम ll

रिश्ता ये अनमोल है,समझो इसका मोल

पावन रिश्ते को कभी, पैसे से ना तोल ll

प्रेम झलकता एक दिन,फिर करते तकरार

दुख सहती बहना अगर, ये कैसा है प्यार ll

दिल से बहना को सभी, देना स्नेह दुलार

याद करे बहना कभी,मत करना इनकार ll

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on August 27, 2018 at 7:30pm

भाई सुरेन्द्र जी उत्साह वर्धन के लिए आपका बहुत बहुत आभार

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on August 27, 2018 at 7:29pm

आदरणीया बविता जी आपके उत्साह वर्धन से नई ऊर्जा मिली दिल से शुक्रिया

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on August 27, 2018 at 7:27pm

आदरणीय विजय निकोर साहब कविता को मान देने के लिए दिल से आभार

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on August 27, 2018 at 7:26pm

आदरणीय समर साहब जी सादर अभिवादन आपके उत्साह वर्धन से मन प्रसन्न हुआ दिल से आभार

Comment by Samar kabeer on August 27, 2018 at 4:54pm

जनाब डॉ.छोटेलाल सिंह जी आदाब,रक्षा बंधन पर बहुत अच्छे दोहे रचे आपने,इस  प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by vijay nikore on August 27, 2018 at 2:24pm

वाह, आनन्द आ गया। हार्दिक बधाई, आदरणीय छोटेलाल सिंह जी।

Comment by babitagupta on August 26, 2018 at 9:47pm

भाई बहिन के अटूट बंधन के पर्व पर उम्दा रचना,बधाई स्वीकार कीजियेगा आदरणीय सरजी।

Comment by नाथ सोनांचली on August 26, 2018 at 2:25pm

आद0 भैया डॉ. छोटेलाल सिंह जी सादर अभिवादन। प्रासंगिक और समयानुकूल बेहतरीन दोहों के सृजन पर बहुत बाह्य बधाई देता हूँ।

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on August 26, 2018 at 1:54pm

आदरणीय शेख सहजाद साहब बहुत बहुत शुक्रिया आपका

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on August 26, 2018 at 12:51pm

आदाब। बेहतरीन यथार्थपूर्ण प्रेरक छंद सृजन। पावन रक्षाबंधन पर्व की हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनाएं जनाब डॉ. छोटे लाल सिंह साहिब।

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