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आल्हा (वीर छन्द)

बरसे बादल उमड़ घुमड़ के,चहुँ दिशि गूँजे चीख पुकार

गाँव नगर सब डूब गया है,कुदरत की ऐसी है मार

विषम घड़ी आयी केरल में,बाढ़ मचाई है उत्पात

कांप उठा है कोना कोना, संकट से ना मिले निजात

भारी जन धन काल गाल में,कैसे सभी बचाएं जान

खेत सिवान झील में बदले,ध्वस्त हुए सारे अरमान

तहस नहस केरल की धरती,मची तबाही चारो ओर

नाव चले गलियों कूँचे में,काल क्रूर बन गया कठोर

जमींदोज सब भवन हो गए,आयी बाढ़ बड़ी विकराल

सारी नदियाँ हुई समंदर,निगल गयी सबकुछ तत्काल

जीव जंतु पर आफत आयी,व्यथित हृदय हैं सब लाचार

तितर बितर हो गयी व्यवस्था, कैसे कोई पाए पार

सब हिल मिलकर आगे आएं,तुरत मदद की है दरकार

मानवता को सभी बचाएं,चाहे कोई भी सरकार

नहीं सियासत शोभा देगी,दिल की सभी सुने आवाज

सदा धैर्य से करें समर्पित,तनमन धन केरल पर आज ll

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on August 25, 2018 at 8:51pm

वाह उत्तम भावों से ओतप्रोत रचना..बधाई

Comment by vijay nikore on August 25, 2018 at 3:25pm

केरल की आपदा पर भावपूर्ण अच्छी रचना के लिए बधाई, छोटे लाल जी।

Comment by Neelam Upadhyaya on August 24, 2018 at 3:55pm

आदरणीय डॉ छोटे लाल जी, नमस्कार ।  आपदा ग्रस्त केरल का बहुत ही सटीक चित्रण करती हुई बढ़िया रचना।  प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें। 

Comment by Sushil Sarna on August 24, 2018 at 3:51pm

बहुत सुंदर आदरणीय डॉ छोटे लाल जी। ... इस बेहतरीन प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई।

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on August 23, 2018 at 9:31pm
आदरणीया बविता जी आपके उत्साह वर्धन से मन प्रसन्न हुआ दिल से धन्यवाद
Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on August 23, 2018 at 9:30pm
परमादरणीय समर साहब जी सादर अभिवादन आपके मार्गदर्शन से हम अभिभूत हैं और हमेशा आपके सुझाव को प्रेरक मानकर एक कदम बढ़ाने का प्रयास करता हूँ पुनः सादर नमन
Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on August 23, 2018 at 9:26pm
आदरणीय आरिफ साहब सादर अभिवादन आपके उत्साह वर्धन से आत्मिक ऊर्जा प्राप्त हुई बहुत बहुत आभार
Comment by babitagupta on August 23, 2018 at 6:33pm

बेहतरीन रचना द्वारा केरल की आपातकालीन मार से तृस्त व्यथा को दर्शाती रचना,आदरणीय सरजी बधाई स्वीकार कीजियेगा। 

Comment by Samar kabeer on August 23, 2018 at 3:24pm

जनाब डॉ.छोटेलाल सिंह जी आदाब,केरल की तबाही पर बहुत उम्दा आल्हा छन्द लिखे आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

एक दो जगह टंकण त्रुटियाँ देखें,इसके अलावा कुछ बातें आपके संज्ञान में लाना चाहूँगा ।

नाव चले गलियों कूँचे में,'

इस पंक्ति में 'कूँचे' को "कूचे" कर लें ।

' चाहे कोई भी सरकार'

इस पंक्ति को यूँ कर सकते हैं :-

'चाहे कोई हो सरकार'

आख़री छन्द में "आवाज़'' और "आज" की तुकान्तता सहीह नहीं है ।

Comment by Mohammed Arif on August 22, 2018 at 8:50pm

आदरणीय छोटे लाल जी आदाब,

                             वाकई केरल की आपदा हम सब भारतीयों के लिए दु:ख की घड़ी है । केरल में सबकुछ तबाह हो गया है । हमारा विकास विनाश भी लेकर आ रहा है । प्राकृतिक संसाधनों का ग़लत दोहन के कारण और बेतरतीत निर्माण के कारण यह स्थिति पैदा हुई है । हार्दिक बधाई  ।

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