मुआवज़ा - लघुकथा -
देश भक्त पार्टी के एक नामी नेता रेल हादसे पर विरोध जताने अपने समर्थकों की भारी भीड़ लेकर डी एम साहब के दफ़्तर पहुंच गये और जम कर नारेबाज़ी शुरू कर दी। थोड़ी देर में साहब ने नेताजी को दफ़्तर में बुला लिया।
"क्या हुआ भैया जी, इतना शोरगुल किसलिये। हम लोग तो खुद ही रात दिन इसी काम में लगे हुए हैं।"
"जनाब, हम जन प्रतिनिधि हैं।लोगों को सब जानकारी देनी पड़ती है कि प्रशासन क्या कर रहा है। इतना समय हो गया, आप लोगों की ओर से कोई पुख्ता खबर नहीं आई मीडिया में।"
"भैया जी, बहुत तीव्र गति से कार्य हो रहा है।कुछ ही दिन में आश्रित परिजनों को मुआवज़ा मिल जायेगा।"
"साहब जी, यह गोलमोल बातें छोड़ो, ठोस जवाब दो? बाढ़ के समय आपने जो घपले किये थे, सब पता है हमें|"
"भैया जी, आप तो नाराज़ हो गये |आपका कोई बंदा घटना में हताहत हुआ है क्या?"
"सभी तो हमारे ही हैं।"
साहब ने पी ए को निर्देश दिया ," भैया जी का नाम मुआवज़ा पाने वालों की लिस्ट में डाल दो। किसी लावारिस लाश की फ़ोटो लेकर फ़ाइल बना लो। भैया जी हलफ़नामा और आवश्यक कागजात दे जायेंगे।"
मौलिक एवम अप्रकाशित
Comment
हार्दिक आभार आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी।
हार्दिक आभार आदरणीय मिर्ज़ा ज़ावेद बेग जी।
हार्दिक आभार आदरणीय समर क़बीर साहब जी।
आ. भाई तेजवीर जी, बेहतरीन कथा हुई है । हार्दिक बधाई ।
जनाब तेजवीर सिंह जी आदाब
वाह न्याय व्यवस्था पर सटिक कटाक्ष करती हुई रचना के लिए बधाई स्वीकार करें
जनाब तेजवीर सिंह जी आदाब,अच्छी लघुकथा हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।
हार्दिक आभार आदरणीय शेख उस्मानी साहब जी।
आजा... आजा... मुआवज़ा आजा। भ्रष्टाचार के आदी , योजनाओं व घोषणाओं के अवैध हितग्राहियों पर बेहद यथार्थपूर्ण कड़वा कटाक्ष। हार्दिक बधाई आदरणीय तेजवीर सिंह साहिब।
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