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हमेशा तो नहीं होती बुरी तकरार की बातें(ग़ज़ल)

1222 1222 1222 1222


हमेशा तो नहीं होती बुरी तकरार की बातें
इसी तकरार से अक्सर निकलतीं  प्यार की बातें।

नज़र मंजिल पे रक्खो तुम बढ़ाओ फिर कदम आगे
नहीं अच्छी लगा करतीं हमेेशा हार की बातें।

अँधेरे में चरागों-सा उजाला इनसे मिल जाता
गुनी जाएं तज्रिबे  के  सही गर सार की बातें।

अलग हैं रास्ते चाहे है मंजिल एक पर सबकी
जो ढूंढें खोट औरों में करे वो रार की बातें।

सँभलने का, समझने का, सलीका आ यूँ जाता है
कि खुद की गलतियों के जो करें इकरार की बातें।

समझना चाहते हो मोल खुशबू का कहीं दिलबर
सुनो तुम ध्यान से पहले वहाँ के ख़ार की बातें।

तज्रिबा:अनुभव

मौलिक अप्रकाशित

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Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on November 7, 2018 at 7:29am

आदरणीय तेजवीर सिंह जी सादर नमन! हौंसलाफजाई के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया।

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on November 7, 2018 at 7:27am

प्रचलित शब्द के रूप में मान्यता देते हैं। सादर

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on November 7, 2018 at 7:25am

आदरणीय समर कबीर जी सादर वन्दन! हौंसलाफ़ज़ाई और मार्गदर्शन के लिए सादर आभार। इस लफ्ज के अलावा जो टंकण त्रुटि है कृपया वह भी इंगित करें। माननीय मद्दाह अपने शब्दकोश में मूल शब्द /तज्रिब:/ तज्रिबा बताते हैं व् इसका बहुवचन तज्रिबात ही लेेकीन साथ ही / तजुुर्बा या तज्रबा/ को भी 

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on November 7, 2018 at 7:15am

आदरणीय रवि सर सादर नमन! तराशने की कोशिश जारी रहेगी। मार्गदर्शन भी सादर अपेक्षित है। हौंसलाफ़ज़ाई के लिए तहेदिल शुक्रिया।

Comment by TEJ VEER SINGH on November 6, 2018 at 2:46pm

हार्दिक बधाई आदरणीय सतविंदर जी।बेहतरीन गज़ल।

अँधेरे में चरागों-सा उजाला इनसे मिल जाता
गुनी जाएं तजुर्बे के सही गर सार की बातें।

Comment by Samar kabeer on November 6, 2018 at 12:09pm

जनाब सतविन्द्र कुमार जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।

कुछ मिसरों में रवानी की कमी है,देखियेगा ।

' गुनी जाएं तजुर्बे के सही गर सार की बातें'

इस मिस्ररे में 'तजुर्बे' ग़लत शब्द है,सहीह शब्द है,"तज्रिबा" और इसका बहुवचन है "तज्रिबात"

कुछ मिसरों में टंकण त्रुटियाँ देखें ।

Comment by Ravi Shukla on November 6, 2018 at 1:11am

आदरणीय सतिवंदर कुमार जी अच्छी गजल कही आपने िदली बधाई पेश करताहूँ बेहतरी की गुंजाईशा तो हमेशा  रहती है रवानी बढ़ाने के  लिए देखते रहें । सादर 

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