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कुछ क्षणिकाएं जीवन पर :

कुछ क्षणिकाएं जीवन पर :

लो
आज मैं बड़ा हो गया
अपनी नेम प्लेट
लगाकर
बूढ़ी नेमप्लेट
हटा कर

.................

ज़िंदगी
हार गयी
ज़िंदगी से
खून से
खून की दरिंदगी से

..............................

असंभव को
संभव कर दिया
ज़िंदगी को
मरघट की
राह बता कर

............................

वृद्धाश्रम में
माँ -बाप को छोड़
बड़ा उपकार किया
संतान ने
दूध का क़र्ज़
उतार दिया

..........................

गिनने लगी
संतान
साँसें
इस तन को
साँसें
देने वाले की

............................

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by PHOOL SINGH on Tuesday

सूंदर रचना

Comment by Sushil Sarna on December 1, 2018 at 3:31pm

आदरणीय समर कबीर साहिब , आदाब .... प्रस्तुति के भावों को अपनी प्रेरक प्रतिक्रिया से मान देने का दिल से आभार।

Comment by Sushil Sarna on December 1, 2018 at 3:31pm

आदरणीय राज नवदेवी साहिब , आदाब .... सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार।

Comment by Samar kabeer on December 1, 2018 at 2:35pm

जनाब सुशील सरना जी आदाब,उम्दा क्षणिकाएँ हुई हैं,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by राज़ नवादवी on December 1, 2018 at 11:01am

आदरणीय रोहिताश्व जी आदाब, आदाब. सुन्दर, क्षणिकाएँ, भावों से भरीं. ढेरों बधाईयाँ. सादर. 

Comment by Sushil Sarna on November 30, 2018 at 2:55pm

आदरणीय नरेन्द्र सिंह चौहान जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार।

Comment by Sushil Sarna on November 30, 2018 at 2:55pm

आदरणीय मो.आरिफ साहिब , आदाब .... सृजन के भावों पर आपकी मधुर प्रशंसा का दिल से आभार।

Comment by narendrasinh chauhan on November 30, 2018 at 1:42pm

सत्य, 

लाजवाब रचना 

Comment by Mohammed Arif on November 30, 2018 at 1:17pm

आदरणीय सुशील सरना जी आदाब,

                        बहुत कटाक्षपूर्ण क्षणिकाएँ । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

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