For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल (प्यार का हर दस्तूर निभाना पड़ता है)

ग़ज़ल (प्यार का हर दस्तूर निभाना पड़ता है)
(फ्अल_फ ऊलन _फ्अल _फ ऊलन _फ़ेलुन _फा)

प्यार का हर दस्तूर निभाना पड़ता है l
यार का हर ग़म हँस के उठाना पड़ता है l

बाज़ कहाँ वो यूँ आता है महफ़िल में
शीशा नुक्ता चीं को दिखाना पड़ता है l

यूँ ही मुसाफ़िर मिटती नहीं है तारीकी
रस्ते में इक दीप जलाना पड़ता है l

उलफत की मंज़िल आसान नहीं इतनी
धोका हर इक मोड़ पे खाना पड़ता है l

रह पाता है कोई सदा कब दुनिया में
एक न इक दिन सब को जाना पड़ता है l

मज़दूरी मज़दूर को कब यूँ है मिलती
खून पसीना उसको बहाना पड़ता है l

खेल मुहब्बत का तस्दीक है कुछ ऎसा
जिस में दिल दाँव पे लगाना पड़ता है l

(मौलिक व अप्रकाशित

Views: 285

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Balram Dhakar on December 24, 2018 at 11:44pm

आदरणीय तस्दीक साहब, बहुत ख़ूबसूरत ग़ज़ल।

हार्दिक बधाई स्वीकार करें।

सादर।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on December 13, 2018 at 5:54pm

जनाब फूल साहिब , ग़ज़ल पसंद करने और आपकी हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया I 

Comment by PHOOL SINGH on December 13, 2018 at 4:52pm

बहुत सुंदर रचना ,बधाई स्वीकारे

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on December 12, 2018 at 4:51pm

मुहतरम जनाब तेज वीर साहिब  , ग़ज़ल पसंद करने और आपकी हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया I 

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on December 12, 2018 at 4:50pm

मुहतरम जनाब समर साहिब आ दाब, ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया I आपने सही फरमाया  इस में की जगह जिस में हो गया l

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on December 12, 2018 at 4:47pm

जनाब भाई लक्ष्मण धामी साहिब  , ग़ज़ल पसंद करने और आपकी हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया I 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 12, 2018 at 1:31pm

आ. भाई तस्दीक अहमद जी, सुंदर गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।

Comment by Samar kabeer on December 12, 2018 at 11:01am

जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।


'जिस में दिल दाँव पे लगाना पड़ता है'

ये मिसरा शायद टंकण त्रुटि का शिकार है? 

Comment by TEJ VEER SINGH on December 12, 2018 at 10:57am

हार्दिक बधाई आदरणीय तस्दीक अहमद खान साहब जी।बेहतरीन गज़ल ।

रह पाता है कोई सदा कब दुनिया में
एक न इक दिन सब को जाना पड़ता है l

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (क्या नसीब है)
"मुहतरम जनाब समर कबीर साहिब, आदाब। ग़ज़ल पर आपकी हाज़िरी, इस्लाह और हौसला अफ़ज़ाई के लिये तहे-दिल से…"
3 hours ago
Alok Rawat replied to डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's discussion ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की साहित्य-संध्या माह मई 2020–एक प्रतिवेदन ::  डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव
"वाक़ई, ओबीओ लखनऊ चैप्टर की माह मई 2020 की मासिक गोष्ठी बहुत ही शानदार ढंग से सम्पन्न हुई | इस गोष्ठी…"
10 hours ago
Dr. Chandresh Kumar Chhatlani commented on Dr. Chandresh Kumar Chhatlani's blog post नया पकवान / लघुकथा / चंद्रेश कुमार छतलानी
"रचना पसंद कर उस पर अपनी टिप्पणी देने हेतु हार्दिक आभार आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी…"
10 hours ago
Usha Awasthi posted a blog post

क्यों ना जड़ पर चोट ?

पैसों से क्या जान कोहम पाएगें तोल ?सदा - सदा को बुझ गएजब चिराग़ अनमोलकिन-किन के थे वरद हस्तजो पनपी…See More
11 hours ago
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"आदरणीय समर कबीर साहब बहुत बहुत आभार सर आपकी सलाह के बिना मेरी हर ग़ज़ल अधूरी है आप कुशल से तो है ना…"
13 hours ago
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"आदरणीय लक्ष्मण धामी मुसाफ़िर जी हार्दिक आभार जो टंकण त्रुटियां आपको दिखाई दें उन्हें बता भी दिया…"
13 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"दोस्तो आदाब, पारिवारिक समस्याओं के कारण कुछ समय ओबीओ पर हाज़िर नहीं हो सकूँगा,सिर्फ़ तरही मुशाइर: में…"
13 hours ago
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"जनाब मनोज कुमार अहसास जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें । ये देख कर प्रसन्नता…"
14 hours ago
Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मौत से कह दो न रोके -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है, बधाई स्वीकार करें…"
14 hours ago
Samar kabeer commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल ( आएगी कल वफ़ात भी तू सब्र कर अभी...)
"जनाब सालिक गणवीर जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें । बहुत कुछ तो जनाब रवि भसीन जी…"
14 hours ago
Samar kabeer commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post पीपल वाला गाँव नहीं है-ग़ज़ल
"जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है,बधाई स्वीकार करें । 'दिखते हैं कुछ पेड़…"
14 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted a blog post

उमड़ता जब हृदय में प्यार कविता जन्म लेती है (११५ )

ग़ज़ल (1222 *4 ).उमड़ता जब हृदय में प्यार कविता जन्म लेती है  प्रकृति जब जब करे शृंगार कविता जन्म लेती…See More
14 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service