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नववर्ष की शुभकामनाएं प्रेषित करती कविता (पञ्चचामर छंद)

नवीन वर्ष को लिए, नया प्रभात आ गया
प्रभा सुनीति की दिखी, विराट हर्ष छा गया
विचार रूढ़ त्याग के, जगी नवीन चेतना
प्रसार सौख्य का करो, रहे कहीं न वेदना।।1।।

मिटे कि अंधकार ये, मशाल प्यार की जले
न क्लेश हो न द्वेष हो, हरेक से मिलो गले
प्रबुद्ध-बुद्ध हों सभी, न हो सुषुप्त भावना
हँसी खुशी रहें सदा, यही 'सुरेन्द्र' कामना।।2।।

न लक्ष्य न्यून हो कभी, सही दिशा प्रमाण हो
न पाँव सत्य से डिगें, अधोमुखी न प्राण हो
विवेकशीलता लिए, विकार से कटें रहें
सुनीति रीति शान में, महानता रटें रहें।।3।।

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on January 6, 2019 at 1:09pm

आद0 केवल प्रसाद सत्यम जी सादर अभिवादन,, आपकी प्रतिक्रिया और सुझावों के लिए हृदय तल से आभार

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on January 4, 2019 at 11:33pm

आदरणीय सुरेन्द्र भाई जी,  मनोहर प्रस्तुति के लिए हार्दिक शुभकामनाएं.  रचना को अभी और समय दीजिए.

नवीन वर्ष को लिए, नया प्रभात आ गया
प्रभा सुनीति की दिखी, विराट हर्ष छा गया
विचार रूढ़ त्याग के जगी नवीन चेतना
प्रसार सौख्य का करो, रहे कहीं न वेदना।।1।।...  वाह

मिटे अँधेर भ्रांति की, मशाल प्यार की जले  .......   मिटे कि अन्धकार ये,
न क्लेश हो न द्वेष हो, हरेक से मिलो गले
चलायमान हों सभी, न हो सुषुप्त भावना................ प्रबुद्ध-बुद्ध हों सभी,
हँसी खुशी रहें सदा, यही 'सुरेन्द्र' कामना।।2।।

न लक्ष्य न्यून हो कभी, सदा समृद्ध ज्ञान हो,   ......सही दिशा प्रमाण हो.
न पाँव सत्य से डिगें, अधोमुखी न प्राण हो 
विवेकशील आप हों, विकारहीनता रहे  ............. विवेकशीलता लिए, विकार से कटें रहें.


सुरीति नीति ज्ञान की, कभी न दीनता रहे।।3।।.. सुनीति रीति शान में, महानता रटें रहें.

शुभ शुभ

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on January 3, 2019 at 3:42pm

आद0 तस्दीक अहमद खान जी सादर अभिवादन। आपकी खूबसूरत प्रतिक्रिया से बल मिला,, आभार आपका

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on January 3, 2019 at 12:05pm

जनाब सुरेन्द्र नाथ साहिब, नए साल पर सुंदर रचना हुई है , मुबारकबाद क़ुबुल फरमाएं l 

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on January 3, 2019 at 7:39am

आद0 लक्ष्मण धामी जी सादर अभिवादन। यह ग़ज़ल नहीं है बन्धु। आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभार

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 2, 2019 at 7:27pm

आ. भाई सुरेन्द्र नाथ जी, सुंदर गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on January 2, 2019 at 3:12pm

आद0 समर कबीर साहब सादर प्रणाम। आपकी उपस्थिति और प्रतिक्रिया का मुझे रचना डालने के बाद से ही प्रतीक्षा रहती है,, क्योकि आपकी बारीक नजर् और अच्छी इस्लाह से रचना में जो कुछ अधूरापन रहता है वह पूर्ण हो जाता है। आपकी प्रतिक्रिया पुरस्कार स्वरूप होती है। आभार व्यक्त करता हूँ आपका। सादर

Comment by Samar kabeer on January 2, 2019 at 2:49pm

जनाब सुरेन्द्र नाथ सिंह जी आदाब,नववर्ष पर अच्छी रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

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