For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

हज़ारों बार क़ुदरत ने इशारा तो किया होगा  ........(११)

++ग़ज़ल ++(1222 1222 1222 1222 )
हज़ारों बार क़ुदरत ने इशारा तो किया होगा 
कभी नाहक कोई तूफ़ान शायद ही उठा होगा 
***
जुनूनी है जिसे मंज़िल नज़र भी साफ़ आती है 
वही अक़्सर अचानक नींद से उठकर खड़ा होगा 
***
समझ रक्खे कोई तो इश्क़ की गलियाँ नहीं देखे 
क़दम पहला उठाया वो यक़ीनन सरफिरा होगा 
***
नफ़ा-नुक़्सान उल्फ़त में लगाए कौन छोडो भी 
ज़रा सा पा लिया हमने कुछ उसने खो दिया होगा 
***
न सोचा था न समझे हम न ही इंकार कर पाए 
जब उसने क़त्ल से पहले भरोसे में लिया होगा 
***
मदद को हाथ उठते कम तमाशे में सभी शामिल 
कभी इंसान ख़ुदग़र्ज़ी की फ़ितरत से जुदा होगा ? 
***
हक़ीक़त हो भले कड़वी मगर आँखों से देखी है 
उसे ही लोग मारेंगे जो दिखता अधमरा होगा 
***
वफ़ा कुछ इस क़दर हम घोल देंगे आब-ए-दरिया में 
हमारे शह्र में आकर न कोई बेवफ़ा होगा 
**
'तुरंत ' आख़िर समझ में क्यों नहीं आती ज़रा सी बात 
सुख़नवर वो बनेगा जिसने कुछ पढ़कर गुना होगा
***
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' बीकानेरी 
05 /01 /2019

(मौलिक और अप्रकाशित )

Views: 415

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on January 8, 2019 at 4:00pm

भाई Gajendra shrotriya आपकी स्नेहिल सराहना के लिए हृदय तल से आभार | स्नेह बनायें रखें | 

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on January 8, 2019 at 3:59pm

आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी ,रचना पर आपके स्नेहिल उद्गारों के  लिए दिल से आभार | समीक्षा का अधिकार हर पाठक को भी होता है ,इस ब्लॉग में sign up करने का उद्देश्य ही कमियों को ढूँढना है | समय हो तो आप की नज़र में कहाँ शब्द विन्यास लय से भटक रहे हैं कृपया इंगित करें | 

Comment by Gajendra shrotriya on January 8, 2019 at 2:02pm

अच्छे अशआर हुए हैं आदरणीय। लगभग सभी शेर पुरअसर और अच्छी कहन में हैं। दिली दाद और बधाई स्वीकार करें।

Comment by नाथ सोनांचली on January 7, 2019 at 9:12am

आद0 गिरधारी सिंह गहलोत जी सादर अभिवादन। बढ़िया ग़ज़ल कही आपने। कहीं कहीं शब्द विन्यास लय से भटकते नजर् आये,, गुणीजनों की समीक्षा का मैं भी प्रतीक्षारत हूँ। बधाई स्वीकार कीजिये इस रचना पर

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आ. भाई सुशील जी , सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहा मुक्तक रचित हुए हैं। हार्दिक बधाई। "
1 hour ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय अजय गुप्ताअजेय जी, रूपमाला छंद में निबद्ध आपकी रचना का स्वागत है। आपने आम पाठक के लिए विधान…"
5 hours ago
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय सौरभ जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय जी ।सृजन समृद्ध हुआ…"
7 hours ago
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय सौरभ जी सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया से समृद्ध हुआ । आपका संशय और सुझाव उत्तम है । इसके लिए…"
7 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"  आदरणीय सुशील सरना जी, आयोजन में आपकी दूसरी प्रस्तुति का स्वागत है। हर दोहा आरंभ-अंत की…"
7 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"  आदरणीय सुशील सरना जी, आपने दोहा मुक्तक के माध्यम से शीर्षक को क्या ही खूब निभाया है ! एक-एक…"
7 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२१२२/२१२२/२१२ **** तीर्थ  जाना  हो  गया  है सैर जब भक्ति का हर भाव जाता तैर जब।१। * देवता…See More
14 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"अंत या आरंभ  --------------- ऋषि-मुनि, दरवेश ज्ञानी, कह गए सब संतहो गया आरंभ जिसका, है अटल…"
yesterday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा पंचक  . . . आरम्भ/अंत अंत सदा  आरम्भ का, देता कष्ट  अनेक ।हरती यही विडम्बना ,…"
yesterday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा मुक्तक. . . . . आदि-अन्त के मध्य में, चलती जीवन रेख ।साँसों के अभिलेख को, देख सके तो देख…"
yesterday
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"नमस्ते, सुशील जी। आप से मिली सराहना बह्त सुखदायक है। आपका हार्दिक आभार।"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा एकादश. . . . . पतंग

मकर संक्रांति के अवसर परदोहा एकादश   . . . . पतंगआवारा मदमस्त सी, नभ में उड़े पतंग । बीच पतंगों के…See More
Wednesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service